भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच एक बार फिर स्पष्ट किया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। भारत का जोर 140 करोड़ लोगों के लिए किफायती कीमतों पर ऊर्जा की विश्वसनीय और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है। रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने कहा कि देश के ऊर्जा खरीद संबंधी फैसले राष्ट्रीय हितों, आपूर्ति के विविध स्रोतों और उचित कीमतों पर भरोसेमंद उपलब्धता को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।
राजदूत ने भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों को लेकर भी विश्वास जताया। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े तक पहुंच जाएगा।
राष्ट्रीय हितों के आधार पर भारत के ऊर्जा संबंधी फैसले
विनय कुमार के अनुसार, भारत की ऊर्जा खरीद नीति का मुख्य उद्देश्य देश की जरूरतों को पूरा करना और उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर ऊर्जा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता बनाए रखना और कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करना भारत के निर्णयों के महत्वपूर्ण आधार हैं।
अमेरिकी प्रतिबंधों के संदर्भ में भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपनी नीति दोहराई है। देश की बड़ी आबादी और ऊर्जा की व्यापक मांग को देखते हुए विश्वसनीय आपूर्ति बनाए रखना आर्थिक गतिविधियों और उपभोक्ताओं की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत-रूस व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य
रूस में भारत के राजदूत ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों के भविष्य को लेकर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि भारत और रूस का द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है।
यह लक्ष्य दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाओं को दर्शाता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रस्तावित क्षेत्रों, निवेश योजनाओं या समयबद्ध कदमों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
यूरोप के रूसी ऊर्जा आयात का भी दिया उदाहरण
विनय कुमार ने रूस से ऊर्जा खरीद के संदर्भ में यूरोप का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि यूरोपीय देशों ने वर्ष 2022 से अब तक 320 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य के रूसी ऊर्जा संसाधनों का आयात किया है।
उनकी इस टिप्पणी में वैश्विक ऊर्जा व्यापार और विभिन्न देशों की ऊर्जा जरूरतों के संदर्भ को रेखांकित किया गया। भारत का कहना है कि ऊर्जा खरीद से जुड़े उसके फैसले राष्ट्रीय हितों, विविध आपूर्ति स्रोतों और किफायती कीमतों पर भरोसेमंद उपलब्धता के आधार पर तय होते हैं।
