भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के लागू होने के बाद भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में वृद्धि की बड़ी संभावनाएं हैं। ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (TPCI) ने गुरुवार को यह बात कही। संगठन के अनुसार, ब्रिटेन के विशाल खाद्य आयात बाजार में भारत की मौजूदा हिस्सेदारी काफी कम है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए कारोबार विस्तार के नए अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।
TPCI के आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिटेन हर साल लगभग 50.68 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का आयात करता है। इसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 0.6 प्रतिशत यानी 30.95 करोड़ डॉलर है। यह स्थिति भारतीय खाद्य उत्पाद निर्माताओं के लिए ब्रिटिश बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की संभावनाओं को दर्शाती है।
भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से निर्यातकों को लाभ
भारत और ब्रिटेन ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से 15 जुलाई को CETA लागू किया था। इस समझौते के तहत प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों पर ब्रिटेन द्वारा लगाए जाने वाले 70 प्रतिशत तक के शुल्क समाप्त कर दिए गए हैं।
इसके अलावा, झींगा उत्पादों पर 4.2 से 8.5 प्रतिशत तक के शुल्क और इंस्टेंट कॉफी पर लागू शुल्क भी समाप्त किए गए हैं। इससे भारतीय उत्पादकों को ब्रिटिश बाजार में बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है।
शुल्क में इन बदलावों से भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन में अपने उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक निर्यात वृद्धि बाजार की मांग, उत्पादों की गुणवत्ता और कंपनियों की कारोबारी क्षमता जैसे कारकों पर भी निर्भर करेगी।
TPCI और UKIBC के बीच समझौता
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया ने यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल (UKIBC) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के कारोबारियों के बीच संस्थागत सहयोग को मजबूत करना है। इसके तहत व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान, बाजार संबंधी जानकारी साझा करने, कंपनियों को संभावित कारोबारी साझेदारों से जोड़ने और छोटे तथा मध्यम उद्यमों (SMEs) के विकास के अवसर तैयार करने पर ध्यान दिया जाएगा।
TPCI के अध्यक्ष मोहित सिंघला ने कहा कि नए व्यापार ढांचे के तहत खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र में विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि दोनों संगठन CETA लागू होने के बाद बने सकारात्मक माहौल को वास्तविक व्यापारिक परिणामों में बदलने के लिए मिलकर काम करेंगे।
लंदन में भारत-ब्रिटेन व्यापार कार्यक्रम आयोजित
इन प्रयासों के तहत TPCI और UKIBC ने 15 अक्टूबर को लंदन में खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र पर भारत-ब्रिटेन व्यापार प्रोत्साहन कार्यक्रम आयोजित किया।
इस कार्यक्रम में भारत की 48 निर्यातक कंपनियों और ब्रिटेन के 150 आयातकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य कारोबारी अवसरों की पहचान करना, संभावित साझेदारियां विकसित करना और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना था।
कार्यक्रम में भारतीय निर्यातकों को ब्रिटिश आयातकों से सीधे संपर्क करने और अपने उत्पादों के लिए नए बाजार अवसर तलाशने का मंच मिला।
भारतीय खाद्य उद्योग के लिए नए अवसर
CETA के लागू होने, शुल्क में कटौती और TPCI-UKIBC के बीच सहयोग से भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग को ब्रिटेन में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं। व्यापारिक संपर्क बढ़ाने और बाजार की जरूरतों को समझने के प्रयास विशेष रूप से छोटे तथा मध्यम उद्यमों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
भारत की मौजूदा हिस्सेदारी को देखते हुए ब्रिटिश बाजार में निर्यात विस्तार की गुंजाइश बनी हुई है। आने वाले समय में व्यापार समझौते के लाभों को वास्तविक कारोबारी अवसरों में बदलना भारतीय निर्यातकों और दोनों देशों के व्यापारिक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
