सोमवार को वैश्विक शेयर बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला। जहां अधिकांश एशियाई शेयर बाजारों में भारी बिकवाली के चलते गिरावट दर्ज की गई, वहीं यूरोप के प्रमुख शेयर सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। निवेशकों की ओर से तकनीकी शेयरों में बिकवाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) निवेश को लेकर बढ़ती चिंताओं ने एशियाई बाजारों पर दबाव बनाया।
सबसे बड़ी गिरावट दक्षिण कोरिया के कोस्पी (Kospi) सूचकांक में देखने को मिली, जो 10.8 प्रतिशत तक लुढ़क गया। कारोबार के शुरुआती चरण में ही सूचकांक में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आने पर कोरिया एक्सचेंज (KRX) को सर्किट ब्रेकर लागू करना पड़ा, जिसके बाद लगभग 20 मिनट तक कारोबार रोक दिया गया। इस वर्ष यह सातवीं बार है जब कोरिया एक्सचेंज को सर्किट ब्रेकर सक्रिय करना पड़ा।
दक्षिण कोरिया के अलावा अन्य प्रमुख एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही। ताइवान का ताइएक्स (Taiex) 4.6 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि जापान का निक्केई 225 3.9 प्रतिशत से अधिक गिरावट के साथ बंद हुआ। चीन का शंघाई कंपोजिट लगभग 1.2 प्रतिशत नीचे बंद हुआ, वहीं सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ कारोबार समाप्त करने में सफल रहा।
हालांकि सभी एशियाई बाजारों में गिरावट नहीं रही। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 0.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ और क्षेत्र के प्रमुख सूचकांकों में सकारात्मक प्रदर्शन करने वाला एकमात्र बड़ा बाजार रहा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के मूल्यांकन और निवेश को लेकर बढ़ी अनिश्चितता ने तकनीकी शेयरों पर दबाव बढ़ाया है। इसका सबसे अधिक असर दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे उन बाजारों पर देखने को मिला, जहां तकनीकी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण अधिक है।
दूसरी ओर, यूरोपीय शेयर बाजारों में कारोबार के दौरान सकारात्मक माहौल बना रहा। ब्रिटेन का FTSE 100 करीब 0.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। वहीं जर्मनी का DAX और फ्रांस का CAC 40 दोनों लगभग 0.2 प्रतिशत की तेजी के साथ कारोबार करते देखे गए।
विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों की नजर अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और तकनीकी क्षेत्र में आगे आने वाले घटनाक्रमों पर बनी रहेगी। एशियाई बाजारों में आई तेज गिरावट ने अल्पकालिक चिंता जरूर बढ़ाई है, लेकिन यूरोपीय बाजारों की मजबूती यह संकेत देती है कि वैश्विक निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है।
