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PCB ICC के खिलाफ कानूनी जंग के लिए तैयार

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SamacharToday.co.in - PCB ICC के खिलाफ कानूनी जंग के लिए तैयार - Image Credited by Hindustan Times

इस्लामाबाद/दुबई — क्रिकेट जगत पिछले कई दशकों के सबसे बड़े प्रशासनिक संकट के मुहाने पर खड़ा है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के बीच जारी तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। इस विवाद की जड़ में पाकिस्तान सरकार का वह निर्देश है, जिसके तहत टीम को 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाले T20 विश्व कप 2026 के महा-मुकाबले में भारत के खिलाफ खेलने से मना किया गया है।

हालांकि पाकिस्तान की टीम टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए श्रीलंका पहुँच चुकी है, लेकिन भारत के खिलाफ मैच के “चुनिंदा बहिष्कार” (selective boycott) ने आईसीसी को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। आईसीसी पीसीबी को पूरी तरह से निलंबित करने पर विचार कर रही है। लेकिन, इस्लामाबाद से मिल रही खबरों के अनुसार, पीसीबी भी पीछे हटने को तैयार नहीं है और पुराने कानूनी फैसलों और ऐतिहासिक विवादों के आधार पर आईसीसी को “तगड़ा जवाब” देने की तैयारी कर रही है।

पुराने उदाहरणों का सहारा: 1996, 2003 और 2009

पीसीबी का मुख्य बचाव आईसीसी के अपने इतिहास पर टिका है। पाकिस्तान का तर्क है कि अतीत में भी कई देशों ने सरकारी निर्देशों या सुरक्षा कारणों से विश्व कप मैचों का बहिष्कार किया है, लेकिन उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई।

  • 1996 विश्व कप: कोलंबो में बम धमाके के बाद ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने श्रीलंका में खेलने से इनकार कर दिया था।

  • 2003 विश्व कप: इंग्लैंड ने जिम्बाब्वे में और न्यूजीलैंड ने केन्या में खेलने से मना कर दिया था, क्योंकि उनकी सरकारों ने सुरक्षा कारणों से इसकी अनुमति नहीं दी थी।

  • 2009 T20 विश्व कप: राजनीतिक तनाव के कारण जिम्बाब्वे ने इंग्लैंड के खिलाफ मैच से अपना नाम वापस ले लिया था।

इन सभी मामलों में, टीमों ने केवल अंक (points) गंवाए, लेकिन आईसीसी ने उन पर न तो कोई वित्तीय जुर्माना लगाया और न ही उन्हें निलंबित किया। पीसीबी का तर्क है कि 2026 के इस बहिष्कार को भी “सरकारी हस्तक्षेप” के पुराने उदाहरणों की तरह ही देखा जाना चाहिए।

2018 का विवाद: एक अहम कानूनी दलील

पीसीबी की कानूनी रणनीति का मुख्य आधार 2018 का विवाद समाधान समिति (DRC) का मामला है। उस समय, पीसीबी ने द्विपक्षीय सीरीज न खेलने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) पर 70 मिलियन डॉलर का दावा किया था।

आईसीसी की समिति ने तब पाकिस्तान के दावे को खारिज कर दिया था और बीसीसीआई के इस तर्क को स्वीकार किया था कि भारत सरकार ने सीरीज के लिए अनुमति नहीं दी थी।

“2018 की सुनवाई के दौरान, बीसीसीआई ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वे नहीं खेल सकते क्योंकि उनकी सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी है। आईसीसी ने तब इसे एक वैध कारण माना था। अगर भारत सरकार का इनकार बीसीसीआई के लिए एक बचाव हो सकता है, तो पाकिस्तान सरकार का निर्देश पीसीबी के लिए भी वैध बचाव होना चाहिए। आप दोहरे मापदंड (double standards) नहीं अपना सकते,” पीसीबी की कानूनी तैयारियों से जुड़े एक सूत्र ने बताया।

बांग्लादेश के साथ एकजुटता और स्कॉटलैंड की एंट्री

मौजूदा विवाद तब शुरू हुआ जब आईसीसी ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की सुरक्षा चिंताओं को खारिज कर दिया। बांग्लादेश चाहता था कि उसके मैच भारत के बजाय श्रीलंका में कराए जाएं। आईसीसी के इनकार के बाद बांग्लादेश ने नाम वापस ले लिया और उनकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया।

पाकिस्तान, जिसने सार्वजनिक रूप से बांग्लादेश का समर्थन किया था, ने इसे आईसीसी का “दोहरा मापदंड” बताया। पाकिस्तान का तर्क है कि जब भारत और पाकिस्तान के मैच पहले से ही श्रीलंका (तटस्थ स्थल) पर “हाइब्रिड मॉडल” के तहत हो रहे हैं, तो बांग्लादेश को यह सुविधा क्यों नहीं दी गई।

निलंबन का खतरा और अंतरराष्ट्रीय कोर्ट का रुख

आईसीसी, जिसकी कमान अब जय शाह के हाथों में है, ने संकेत दिया है कि “चुनिंदा भागीदारी” (भारत के खिलाफ न खेलना) का मॉडल स्वीकार्य नहीं है। आईसीसी निम्नलिखित प्रतिबंधों पर विचार कर रही है:

  1. वित्तीय रोक: पाकिस्तान को मिलने वाले वार्षिक आईसीसी राजस्व (लगभग $34.5 मिलियन) को रोकना।

  2. पीएसएल पर संकट: विदेशी खिलाड़ियों को पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) में खेलने के लिए एनओसी (NOC) देने से इनकार करना।

  3. पूर्ण निलंबन: पीसीबी की सदस्यता रद्द करना, जैसा हाल ही में श्रीलंका और जिम्बाब्वे के साथ हुआ था।

यदि आईसीसी ऐसे कदम उठाती है, तो पीसीबी इस मामले को स्विट्जरलैंड स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) में ले जाने के लिए तैयार है। अंतरराष्ट्रीय अदालत में जाना क्रिकेट के इतिहास में एक अभूतपूर्व कदम होगा, जो आईसीसी के वैश्विक राजस्व वितरण को भी प्रभावित कर सकता है।

ब्रॉडकास्टर का भारी नुकसान

बोर्डों के विवाद के बीच, ब्रॉडकास्टर्स (प्रसारणकर्ता) सबसे ज्यादा चिंतित हैं। भारत-पाकिस्तान मैच किसी भी आईसीसी इवेंट का सबसे बड़ा कमर्शियल इंजन होता है, जिससे एक ही दिन में लगभग $38 मिलियन (₹315 करोड़) की कमाई होती है। ब्रॉडकास्टर्स ने अनुबंध के उल्लंघन के लिए पीसीबी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है, जो पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे बोर्ड के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।

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