अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले अर्थव्यवस्था को लेकर मतदाताओं में असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए कांग्रेस पर नियंत्रण बनाए रखना इन चुनावों में अहम होगा। इस बीच बढ़ती कीमतें, महंगाई और घरेलू खर्च मतदाताओं की प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं। कई अमेरिकी नागरिक इसके लिए ट्रंप प्रशासन की नीतियों, खासकर आयात शुल्क (टैरिफ) और ईरान युद्ध को जिम्मेदार मान रहे हैं।
हालांकि, अमेरिकी अर्थव्यवस्था के आंकड़े एक मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं। बेरोजगारी दर ऐतिहासिक रूप से कम है, रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर है और आर्थिक विकास भी मजबूत बना हुआ है। इसके बावजूद रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं की ऊंची कीमतें आम परिवारों के बजट पर दबाव डाल रही हैं।
महंगाई से उपभोक्ताओं का भरोसा कमजोर
उपभोक्ता सर्वेक्षणों के अनुसार, जनवरी 2025 में ट्रंप का दूसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद से आम लोगों का आर्थिक भरोसा कमजोर हुआ है। हालांकि, अलग-अलग सर्वेक्षणों में कुछ अंतर भी दिखाई देता है।
Conference Board का उपभोक्ता विश्वास सूचकांक अक्टूबर में बेहतर हुआ, जबकि University of Michigan का उपभोक्ता भावना सूचकांक लगभग रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
Annex Wealth Management के मुख्य आर्थिक रणनीतिकार ब्रायन जैकबसेन के मुताबिक, दोनों सूचकांक अलग-अलग पहलुओं को मापते हैं। Conference Board का सूचकांक व्यापक अर्थव्यवस्था पर लोगों की राय बताता है, जबकि मिशिगन विश्वविद्यालय का सूचकांक व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति और जीवनयापन की लागत पर केंद्रित है।
बेरोजगारी दर कम, लेकिन नई नौकरियों की रफ्तार धीमी
अमेरिका में श्रम बाजार के कुछ संकेत सकारात्मक हैं। कंपनियां बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी नहीं कर रही हैं और बेरोजगारी भत्ते के लिए साप्ताहिक दावे लगभग 57 वर्षों के निचले स्तर के करीब हैं।
सितंबर में बेरोजगारी दर 4.2 प्रतिशत रही। पिछले पांच वर्षों से यह दर 4.5 प्रतिशत से ऊपर नहीं गई है, जो अब तक का सबसे लंबा ऐसा दौर बताया गया है।
हालांकि, कंपनियों की नई नियुक्तियों की रफ्तार धीमी है और नए ग्रेजुएट्स को नौकरी पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद Conference Board के रोजगार संबंधी आंकड़ों में सुधार के संकेत मिले हैं।
शेयर बाजार और AI निवेश से अर्थव्यवस्था को सहारा
अमेरिकी शेयर बाजार में इस साल कई बार रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े निवेश ने बाजार को मजबूती दी है। शेयरों की बढ़ती कीमतों से खासतौर पर उच्च आय वाले परिवारों की संपत्ति में इजाफा हुआ है, जिससे उपभोक्ता खर्च को भी सहारा मिला है।
पिछली तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वार्षिकीकृत विकास दर 3.4 प्रतिशत रही, जो इस साल का सबसे मजबूत प्रदर्शन बताया गया। इसी अवधि में कारोबारी निवेश में 12.7 प्रतिशत की वार्षिकीकृत वृद्धि दर्ज की गई।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने CNBC से बातचीत में कहा कि उपभोक्ता सर्वेक्षणों में निराशा दिखने के बावजूद वास्तविक उपभोक्ता खर्च और कंपनियों की गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।
AI निवेश में गिरावट का जोखिम, महंगाई की चिंता बरकरार
कुछ अर्थशास्त्रियों ने AI निवेश में तेजी को लेकर संभावित जोखिमों की चेतावनी दी है। Amazon और Intel जैसी कंपनियों के वित्तीय नतीजों के बाद AI क्षेत्र में भारी निवेश की स्थिरता पर सवाल उठे हैं। इसके असर से Nasdaq Composite सहित प्रमुख शेयर सूचकांकों में गिरावट देखी गई।
Apollo Global Management के मुख्य अर्थशास्त्री टॉर्स्टन स्लोक ने चेतावनी दी कि AI से जुड़ी उम्मीदों में बड़ी गिरावट आने पर कंपनियां पूंजीगत खर्च कम कर सकती हैं। इससे आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है। वहीं, महंगे तेल, टैरिफ और आव्रजन प्रतिबंधों के कारण महंगाई का दबाव बना रह सकता है। ऐसी स्थिति में अर्थव्यवस्था के धीमे विकास और ऊंची महंगाई का जोखिम बढ़ सकता है।
ईरान युद्ध और महंगे कर्ज से बढ़ी घरेलू मुश्किलें
अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले शुरू होने के बाद जारी आठ महीने के युद्ध ने वैश्विक ईंधन कीमतों को प्रभावित किया है। इसके अलावा AI क्षेत्र की बढ़ती मांग भी महंगाई के दबाव में योगदान दे रही है।
अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 से उपभोक्ता कीमतों और औसत प्रति घंटा मजदूरी में लगभग 5.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसका अर्थ है कि कर्मचारियों की वास्तविक खरीद क्षमता में इस अवधि के दौरान खास सुधार नहीं हुआ है।
महंगे कर्ज ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। 30 साल के होम लोन की ब्याज दर 7 प्रतिशत से ऊपर पहुंचने और घरों की सीमित उपलब्धता के कारण मकानों की कीमतें बढ़ी हैं। इससे कई परिवारों के लिए घर खरीदना मुश्किल हो गया है।
ऐसे आर्थिक माहौल में मतदाता 3 नवंबर के चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन के आर्थिक रिकॉर्ड का मूल्यांकन कर रहे हैं। महंगाई, रोजगार, आवास और रोजमर्रा के खर्च जैसे मुद्दे चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।
