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अक्षय खन्ना: चिड़चिड़े अभिनेता से कल्ट आइकन तक का सफर

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SamacharToday.co.in - अक्षय खन्ना चिड़चिड़े अभिनेता से कल्ट आइकन तक का सफर - Image Crdited by News18SamacharToday.co.in - अक्षय खन्ना चिड़चिड़े अभिनेता से कल्ट आइकन तक का सफर - Image Crdited by News18

मुंबईबॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया में, जहाँ फिल्मी सितारों की छवि को बहुत सोच-समझकर पेश किया जाता है, फिल्म निर्माता फराह खान के अक्षय खन्ना को लेकर किए गए हालिया खुलासों ने फिल्म जगत में एक नई चर्चा छेड़ दी है। आदित्य धर की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ में ‘रहमान डकैत’ के रूप में अपनी शानदार भूमिका से अक्षय खन्ना एक बार फिर लोकप्रियता के शिखर पर हैं। ऐसे में फराह खान की बातें उनके व्यक्तित्व के एक अनछुए पहलू को उजागर करती हैं।

एक लोकप्रिय पॉडकास्ट में फराह खान ने स्वीकार किया कि 90 के दशक में अक्षय के साथ काम करना उनके लिए किसी “सदमे” से कम नहीं था। उनके संस्मरण बताते हैं कि कैसे शारीरिक रूप के प्रति असुरक्षा एक प्रतिभाशाली अभिनेता के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।

90 का दशक: बालों का झड़ना और स्वभाव में चिड़चिड़ापन

फराह के अनुसार, 90 के दशक में अक्षय खन्ना के साथ काम करना एक चुनौतीपूर्ण अनुभव था। फराह ने बताया कि उस समय अक्षय समय से पहले बाल झड़ने (hair loss) की समस्या से जूझ रहे थे, जो उनके चिड़चिड़ेपन का एक बड़ा कारण था। फराह ने कहा, “उस समय अक्षय एक अलग ही व्यक्ति थे। वे अंतर्मुखी थे और सेट पर उनका व्यवहार अच्छा नहीं था। जब भी मैं सुनती थी कि किसी फिल्म में अक्षय खन्ना हैं, तो मैं काम से बचने के लिए कह देती थी कि मेरे पास तारीखें उपलब्ध नहीं हैं।”

फराह ने याद किया कि अक्षय अक्सर गुस्से में चीजें फेंक दिया करते थे और संवादों पर सवाल उठाते थे। उनकी यह असुरक्षा उनकी फिल्मों में भी दिखती थी; फिल्म ‘ताल’ जैसे गानों में, जहाँ बारिश का दृश्य होता था, अक्षय अपने झड़ते बालों को छुपाने के लिए टोपी (cap) पहनते थे।

‘दिल चाहता है’: बदलाव का एक महत्वपूर्ण मोड़

दोनों के बीच पेशेवर दूरियां 2001 में फरहान अख्तर की फिल्म ‘दिल चाहता है‘ के दौरान कम हुईं। फराह इस फिल्म की कोरियोग्राफर थीं और उन्होंने पाया कि अक्षय अब पूरी तरह बदल चुके हैं। उन्होंने अपने बालों की समस्या को स्वीकार कर लिया था और अब वे काफी शांत (chill) हो गए थे। फराह ने फिल्म के गाने ‘कोई कहे कहता रहे’ में अक्षय के डांस की जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने आमिर और सैफ से भी बेहतर डांस किया था।

वरिष्ठ फिल्म पत्रकार कोमल नाहटा ने इस पर कहा: “अक्षय खन्ना हमेशा से एक बेहतरीन अभिनेता रहे हैं, लेकिन फराह खान की टिप्पणियां फिल्म उद्योग के एक मानवीय पक्ष को दिखाती हैं। अक्षय की अपनी कमियों को स्वीकार करने और अपने शिल्प पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता ही उन्हें आज ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों में एक महान अभिनेता बनाती है।”

‘तीस मार खान’ और ‘धुरंधर’ की सफलता

अक्षय की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही लोग फराह खान की फिल्म ‘तीस मार खान’ में उनके ‘आतिश कपूर’ के किरदार को भी याद कर रहे हैं। फराह ने बताया कि कई अभिनेताओं द्वारा मना किए जाने के बाद अक्षय ने इस भूमिका को स्वीकार किया था और अपनी कॉमेडी से इसे यादगार बना दिया।

आज फराह और अक्षय के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। फराह ने हाल ही में अलीबाग में अक्षय के घर जाकर उन्हें ‘धुरंधर‘ की सफलता की बधाई दी। अक्षय खन्ना का यह सफर साबित करता है कि सिनेमा में लंबी पारी खेलने के लिए लुक्स से ज्यादा खुद को बदलने और अपनी कला के प्रति समर्पित रहने की जरूरत होती है।

शमा एक उत्साही और संवेदनशील लेखिका हैं, जो समाज से जुड़ी घटनाओं, मानव सरोकारों और बदलते समय की सच्ची कहानियों को शब्दों में ढालती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली है। शमा का विश्वास है कि पत्रकारिता केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों और परिवर्तन की आवाज़ है। वे हर विषय को गहराई से समझती हैं और सटीक तथ्यों के साथ ऐसी प्रस्तुति देती हैं जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर दे। उन्होंने अपने लेखों में प्रशासन, शिक्षा, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को विशेष रूप से उठाया है। उनके लेख न केवल सूचनात्मक होते हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा भी दिखाते हैं।

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