इंदरमीत गिल बोले- लंबा संघर्ष महंगाई, ऊंची ब्याज दरों और कर्ज संकट को दे सकता है बढ़ावा
विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री इंदरमीत गिल ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता संघर्ष लंबा खिंचता है तो 2026 में वैश्विक आर्थिक विकास दर घटकर 1.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यह 2025 में दर्ज 2.9 प्रतिशत की वृद्धि दर से काफी कम होगी। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक जारी रहने वाली सैन्य कार्रवाई वैश्विक महंगाई बढ़ाने, ब्याज दरों को ऊंचा रखने और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर दबाव डालने का कारण बन सकती है।
छह महीने से अधिक युद्ध की स्थिति सबसे बड़ा खतरा
रॉयटर्स से बातचीत में गिल ने कहा कि विश्व बैंक ने जून में जारी अपने आर्थिक पूर्वानुमान में तीन संभावित परिदृश्यों का आकलन किया था। इनमें सबसे खराब स्थिति वह थी, जिसमें मध्य पूर्व में संघर्ष छह महीने या उससे अधिक समय तक जारी रहे। उनके अनुसार मौजूदा हालात तेजी से उसी दिशा में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस स्थिति में वैश्विक महंगाई दर 4.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। तेल अवसंरचना को नुकसान और आपूर्ति में बाधा से खाद्य उत्पादन भी प्रभावित होगा, क्योंकि उर्वरक, हीलियम और सल्फर जैसी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो सकती है।
गरीब देशों पर बढ़ेगा सबसे ज्यादा दबाव
गिल ने कहा कि कोविड-19 महामारी से पूरी तरह नहीं उबर पाए निम्न और मध्यम आय वाले देशों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ेगा। खाद्य असुरक्षा बढ़ सकती है और बढ़ती ब्याज दरों के कारण कर्ज का बोझ भी तेजी से बढ़ेगा।
उन्होंने बताया कि कई विकासशील देशों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण जैसी आवश्यक सेवाओं पर खर्च कम करना पड़ सकता है, क्योंकि उन्हें बढ़ते कर्ज और ब्याज भुगतान के लिए अधिक संसाधन जुटाने होंगे। विश्व बैंक के अनुसार जून 2026 तक 40 प्रतिशत निम्न और मध्यम आय वाले देश या तो पहले से कर्ज संकट में हैं या उसके उच्च जोखिम का सामना कर रहे हैं। यदि ब्याज दरें और बढ़ती हैं तो यह संख्या और बढ़ सकती है।
अमेरिका, चीन और भारत अपेक्षाकृत मजबूत
इंदरमीत गिल ने कहा कि दुनिया की तीन बड़ी अर्थव्यवस्थाएं—अमेरिका, चीन और भारत—अभी तक इस संघर्ष के प्रत्यक्ष आर्थिक प्रभाव से अपेक्षाकृत सुरक्षित रही हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों के पास अलग-अलग प्रकार की आर्थिक मजबूती है, जबकि छोटे और विकासशील देशों के सामने चुनौतियां कहीं अधिक गंभीर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जी-20 देशों ने कर्ज पुनर्गठन व्यवस्था में कुछ सुधार किए हैं, लेकिन यह प्रक्रिया अभी भी धीमी गति से आगे बढ़ रही है।
AI से विकासशील देशों को मिल सकता है बड़ा लाभ
गिल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक के नए विश्लेषण के अनुसार विकासशील देशों पर AI का नकारात्मक प्रभाव विकसित देशों की तुलना में कम होगा।
उनके अनुसार गरीब देशों की केवल लगभग 10 प्रतिशत आबादी AI से प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो सकती है, जबकि विकसित देशों में यह आंकड़ा 30 से 40 प्रतिशत तक हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि सही नीतियां अपनाई जाएं तो AI विकासशील देशों की उत्पादकता बढ़ाकर भविष्य में आर्थिक वृद्धि को नई गति दे सकता है।
