25 दिन की समुद्री यात्रा के बाद भी 90% आम सुरक्षित पहुंचे, नई तकनीक से निर्यात लागत घटी
भारत ने ताजे फलों के निर्यात के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए उत्तर प्रदेश के अमरोहा से 12.5 टन दशहरी और लंगड़ा आम सफलतापूर्वक समुद्री मार्ग से दुबई भेजे हैं। यह सफलता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (ICAR-CISH) और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित नए निर्यात प्रोटोकॉल की व्यावसायिक सफलता को दर्शाती है।
40 फीट रेफ्रिजरेटेड कंटेनर में भेजी गई खेप
आमों की खेप 40 फीट के रेफ्रिजरेटेड कंटेनर के जरिए अमरोहा की शहनाज एक्सपोर्ट ने अत्ताशी ग्लोबल के सहयोग से दुबई स्थित लुलु ग्रुप को भेजी। पूरे निर्यात अभियान में ICAR-CISH ने तकनीकी मार्गदर्शन और APEDA ने लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की।
वैज्ञानिक तकनीक से बढ़ी आमों की गुणवत्ता
22 जून को तोड़े गए आमों को वैज्ञानिक पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन प्रणाली के तहत तैयार किया गया। निर्यात से पहले फलों पर METWASH तकनीक का उपयोग किया गया, जिसे ICAR-CISH ने आमों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए विकसित किया है। इसके बाद आमों की वैज्ञानिक ग्रेडिंग और पैकिंग अमरोहा पैक हाउस में की गई तथा पूरी आपूर्ति श्रृंखला के दौरान कोल्ड चेन बनाए रखी गई, जिससे गुणवत्ता सुरक्षित रही।
खराब मौसम के बावजूद सफल रहा समुद्री निर्यात
पश्चिमी विक्षोभ के कारण यात्रा में देरी हुई, लेकिन खेप 17 जुलाई को दुबई पहुंच गई। इस तरह खेत से बाजार तक की कुल यात्रा 25 दिनों में पूरी हुई। कृषि मंत्रालय के अनुसार, लंबी यात्रा के बावजूद करीब 90 प्रतिशत आम पूरी तरह बाजार योग्य स्थिति में पहुंचे। इससे यह साबित हुआ कि समुद्री मार्ग से भी प्रीमियम भारतीय आमों का सफल निर्यात संभव है।
किसानों को मिली अधिक कीमत
सरकार ने बताया कि समुद्री परिवहन की लागत हवाई मार्ग की तुलना में काफी कम रही। इससे निर्यातकों को किसानों को पारंपरिक निर्यात व्यवस्था की तुलना में ₹15 से ₹20 प्रति किलोग्राम अतिरिक्त भुगतान करने का अवसर मिला। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ भारतीय आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
खाड़ी देशों में बढ़ेंगे समुद्री निर्यात के अवसर
यह पहली बार है जब उत्तर प्रदेश के दशहरी और लंगड़ा आमों का 25 दिन की समुद्री यात्रा के बाद सफल व्यावसायिक निर्यात दुबई किया गया है। कृषि मंत्रालय का मानना है कि इस नई तकनीक और प्रोटोकॉल से खाड़ी देशों सहित अन्य वैश्विक बाजारों में समुद्री मार्ग से आमों का निर्यात बढ़ेगा। सरकार के अनुसार, इससे निर्यात लागत घटेगी, विदेशी बाजारों तक पहुंच आसान होगी, निर्यात आय में वृद्धि होगी और आम उत्पादक किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
