भारत-रवांडा व्यापार संबंधों को नई मजबूती, पहली संयुक्त व्यापार समिति बैठक

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भारत और रवांडा ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से 30-31 जुलाई को नई दिल्ली में भारत-रवांडा संयुक्त व्यापार समिति (Joint Trade Committee-JTC) की पहली बैठक आयोजित की। इस बैठक के साथ दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग की नियमित समीक्षा के लिए एक स्थायी संस्थागत तंत्र की औपचारिक शुरुआत हो गई।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव अमित कुमार ने किया, जबकि रवांडा की ओर से विदेश एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय के एशिया, प्रशांत और मध्य पूर्व मामलों के महानिदेशक वर्जिल रवान्यागातारे ने प्रतिनिधित्व किया। बैठक के उद्घाटन सत्र में वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव यशवीर सिंह ने कहा कि संयुक्त व्यापार समिति दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहित करने, व्यापारिक विविधीकरण और लॉजिस्टिक बाधाओं को दूर करने के लिए सर्वोच्च द्विपक्षीय मंच के रूप में कार्य करेगी।

बैठक के दौरान दोनों देशों ने वस्तुओं और सेवाओं के मौजूदा व्यापार की समीक्षा की। भारत से रवांडा को मुख्य रूप से दवा उत्पाद, जैविक उत्पाद, दोपहिया और तिपहिया वाहन, औद्योगिक एवं विद्युत मशीनरी, ऑयल मील तथा लौह एवं इस्पात उत्पादों का निर्यात किया जाता है। वहीं रवांडा से भारत में सीसा, मसाले, आवश्यक तेल, तांबा, बहुमूल्य एवं अर्ध-बहुमूल्य पत्थर, प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद और खनिजों का आयात होता है।

दोनों देशों ने व्यापारिक टोकरी को और विविध बनाने, बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) संपर्क बढ़ाने तथा बाजार पहुंच से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने पर सहमति व्यक्त की। भारत ने भारी इंजीनियरिंग उत्पादों, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरणों, परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों, वस्त्र, समुद्री उत्पाद, प्लास्टिक, खेल सामग्री, खिलौने, रत्न एवं आभूषण तथा वैज्ञानिक उपकरणों के निर्यात की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि रवांडा के कुल दवा आयात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 24.5 प्रतिशत है, जिससे भारत वहां का सबसे बड़ा फार्मास्यूटिकल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

रवांडा ने भारतीय बाजार के लिए मिर्च, मैकाडामिया, फ्रेंच बीन्स, एवोकाडो, आवश्यक तेल, चाय, कॉफी, बागवानी उत्पाद, खनिज और बहुमूल्य पत्थरों को प्राथमिक निर्यात उत्पाद बताया। दोनों पक्षों ने भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और रवांडा स्टैंडर्ड्स बोर्ड के बीच क्षमता निर्माण तथा मानकों के सामंजस्य पर भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

निवेश के क्षेत्र में रवांडा ने बताया कि वर्ष 2025 तक भारत उसका दूसरा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक रहा है। रवांडा ने खनन, कृषि प्रसंस्करण, किफायती आवास, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, स्वास्थ्य, पर्यटन और वित्तीय सेवाओं में निवेश की व्यापक संभावनाएं प्रस्तुत कीं। दोनों देशों ने इन्वेस्ट इंडिया और रवांडा डेवलपमेंट बोर्ड को निवेश समन्वय एजेंसियों के रूप में नामित किया तथा व्यापार मेलों, बिजनेस फोरम और खरीदार-विक्रेता बैठकों का कैलेंडर साझा करने पर सहमति बनाई।

बैठक में भविष्य के सहयोग के लिए महत्वपूर्ण खनिज, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य सेवा, कृषि एवं कृषि प्रसंस्करण, वस्त्र, चमड़ा उद्योग, हरित परिवहन, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, फिनटेक, साइबर सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई। महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत ने रवांडा के टिन, टंगस्टन और टैंटलम संसाधनों के विकास तथा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और रवांडा माइंस, पेट्रोलियम एंड गैस बोर्ड के बीच संस्थागत सहयोग को मजबूत करने में विशेष रुचि व्यक्त की।

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