अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने और क्षेत्र में जारी शत्रुता समाप्त करने की बात कही गई थी। एक अमेरिकी अखबार ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है। हालांकि, ईरान अभी भी अमेरिका की ओर से अपने प्रस्ताव पर आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है।
ईरान ने इससे पहले सात दिन की प्रक्रिया का प्रस्ताव रखा था। इसके तहत सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियां रोकने, अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी हटाने, ईरान की फ्रीज की गई धनराशि जारी करने और तेल प्रतिबंधों में छूट देने की बात शामिल थी। इसके बाद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने का प्रस्ताव था।
हॉर्मुज बना तनाव का प्रमुख केंद्र
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है। यहां समुद्री यातायात में किसी भी तरह की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हॉर्मुज को लेकर स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है। ईरान की ओर से रखे गए प्रस्ताव में क्षेत्रीय तनाव कम करने के साथ-साथ आर्थिक और प्रतिबंध संबंधी मुद्दों को भी शामिल किया गया था।
इराक ने मांगी ईरानी उड़ानों के लिए छूट
इस बीच इराक ने अमेरिकी प्रतिबंधों से अपने कुछ हवाई अड्डों को छूट देने की मांग की है। इराकी प्रधानमंत्री कार्यालय के मीडिया कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि सरकार अमेरिकी पक्ष के साथ सीधे बातचीत कर रही है।
इराक का कहना है कि कुछ हवाई अड्डों को प्रतिबंधों से छूट मिलने से ईरानी एयरलाइनों की उड़ानें दोबारा शुरू की जा सकेंगी। इसमें इलाज, शिक्षा, धार्मिक यात्राओं और नागरिक हितों से जुड़ी मानवीय जरूरतों को आधार बनाया गया है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अमेरिकी प्रतिबंधों की धमकी के बाद इराकी हवाई अड्डों पर ईरानी उड़ानें निलंबित कर दी गई हैं। अमेरिका ने ईरानी एयरलाइनों को सेवाएं देने वाली कंपनियों और हवाई अड्डों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
सऊदी अरब की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले
क्षेत्रीय तनाव के बीच यमन में सक्रिय सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने भी कहा है कि उसने सऊदी अरब की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों और दो ड्रोन को इंटरसेप्ट किया।
गठबंधन के अनुसार, मिसाइलों को खमिस मुशैत और ड्रोन को रियाद की दिशा में भेजा गया था। इन हमलों की जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के सैन्य प्रमुखों ने रियाद में मुलाकात की।
बैठक में सऊदी अरब के सामने मौजूद सुरक्षा खतरों की समीक्षा की गई। तीनों देशों ने इससे पहले 7 अगस्त 2026 को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर भी चर्चा
समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। ऐसे में सऊदी अरब की ओर हुए हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच इस समझौते की क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में भी चर्चा हो रही है।
फिलहाल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ईरान अपने प्रस्ताव पर अमेरिकी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है, जबकि क्षेत्र में हवाई और समुद्री सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम लगातार सामने आ रहे हैं।
