भारतीय शेयर बाजार में छुट्टियों के कारण छोटे कारोबारी सप्ताह के दौरान गिरावट जारी रही। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और लगातार बिकवाली ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। सप्ताह के दौरान निफ्टी 50 में लगभग 2.4 प्रतिशत और बीएसई सेंसेक्स में करीब 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगातार चार कारोबारी सत्रों से गिरावट का सिलसिला जारी रहा।
बाजार में बिकवाली का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर अधिक देखने को मिला। बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने इन शेयरों में अपना निवेश घटाया। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, कंपनियों के मूल्यांकन को लेकर चिंताओं और उधार लेकर किए गए निवेश से जुड़ी पोजिशन में कमी के कारण मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों पर ज्यादा दबाव रहा। इसके मुकाबले बड़े बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों के शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।
ब्रेंट क्रूड छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू शेयर बाजार के लिए प्रमुख चिंता बन गई हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड वायदा 3.1 प्रतिशत बढ़कर 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यह 29 अप्रैल के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर रहा।
अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत में भी 3.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 103.27 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
पूरे सप्ताह के दौरान ब्रेंट क्रूड में 6.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि WTI क्रूड की कीमत 2 प्रतिशत बढ़ी। तेल की कीमतों में इस उछाल ने ऊर्जा लागत और परिवहन खर्च बढ़ने की आशंकाओं को मजबूत किया है।
महंगे तेल से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे ऊर्जा और परिवहन लागत बढ़ सकती है। इसका असर उपभोक्ता खर्च पर पड़ने के साथ तेल की कीमतों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों की कारोबारी गतिविधियों पर भी हो सकता है।
कंपनियों के लिए कच्चे माल और अन्य इनपुट की लागत बढ़ने से मुनाफे का मार्जिन प्रभावित होने की आशंका है। इसी वजह से निवेशक उन क्षेत्रों को लेकर सतर्क बने हुए हैं, जिनकी लागत और कमाई पर तेल की कीमतों का सीधा या अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।
IT शेयरों ने दिखाई अपेक्षाकृत मजबूती
क्षेत्रवार प्रदर्शन में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत मजबूत रहे। शुरुआती बिकवाली के बाद इस क्षेत्र के शेयरों में सुधार हुआ और सप्ताह के अंत तक इनमें कुल मिलाकर ज्यादा बदलाव नहीं हुआ।
विश्लेषकों ने इसके पीछे कंपनियों की आय को लेकर बेहतर अनुमान और निवेशकों की नए सिरे से बढ़ती दिलचस्पी को प्रमुख कारण बताया।
इसके विपरीत, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और रियल एस्टेट क्षेत्रों के शेयरों पर अधिक दबाव रहा। इन क्षेत्रों में इनपुट लागत, मुनाफे के मार्जिन और ब्याज दरों के प्रति संवेदनशीलता को लेकर चिंताएं बनी रहीं।
निफ्टी और सेंसेक्स के अहम स्तर
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी 50 के लिए 22,800 और 23,000 के स्तर तत्काल प्रतिरोध क्षेत्र के रूप में देखे जा रहे हैं। वहीं, सेंसेक्स के लिए 72,500 से 72,600 के बीच का दायरा निकट अवधि में महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है।
निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों पर बनी हुई है। बाजार प्रतिभागियों का कहना है कि महंगा तेल निवेशकों की धारणा और तेल-संवेदनशील क्षेत्रों के प्रदर्शन को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक बना रह सकता है।
