भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर से लागू हो गया है। इस समझौते के तहत भारतीय वस्तुओं को तत्काल 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की जामनगर स्थित रिलायंस रिफाइनरी की यात्रा ने ऊर्जा कूटनीति में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया है। दूसरी ओर, फ्रांस में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद देशव्यापी हिंसा और आर्थिक नुकसान ने सरकार के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
डीडी इंडिया के कार्यक्रम ‘द इकोनॉमिक ब्रीफ’ में इन तीन प्रमुख घटनाक्रमों का विश्लेषण किया गया। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञ और भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के पूर्व कुलपति प्रोफेसर राकेश मोहन जोशी ने भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौते और ऊर्जा क्षेत्र पर अपनी राय रखी। वहीं, ITEC पोलैंड के मिखाल मतलक ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर चर्चा की।
भारत-न्यूजीलैंड FTA से भारतीय निर्यातकों को फायदा
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारतीय उत्पादों को तत्काल शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। आमतौर पर कई मुक्त व्यापार समझौतों में शुल्क घटाने की प्रक्रिया पांच से 15 वर्षों में पूरी होती है, लेकिन इस समझौते में व्यापक स्तर पर तत्काल राहत का प्रावधान किया गया है।
इससे कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग उत्पाद, मशीनरी, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल उपकरण जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश का वादा भी किया है। यह निवेश कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, एग्रीटेक और फिनटेक जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित होगा।
समझौते में भारतीय पेशेवरों और युवाओं के लिए नए अवसर भी शामिल हैं। इसके तहत 5,000 कुशल अस्थायी रोजगार वीजा और 18 से 30 वर्ष के लोगों के लिए 1,000 वर्किंग हॉलिडे वीजा का प्रावधान है। STEM विषयों में स्नातक करने वालों को तीन साल तक पोस्ट-स्टडी वर्क अधिकार भी मिल सकते हैं।
हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील कृषि क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए डेयरी, चीनी, खाद्य तेल और प्याज, चना, मटर, मक्का तथा बादाम सहित कई उत्पादों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा है। दोनों देशों का लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 2.4 अरब डॉलर से बढ़ाकर 7 अरब डॉलर से अधिक करना है।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते पर भी नजर
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भी गतिविधियां तेज हुई हैं। कार्यक्रम में मिखाल मतलक ने बताया कि भारत की यूरोपीय संघ के होराइजन रिसर्च कार्यक्रम में भागीदारी से IIT और CSIR जैसे भारतीय संस्थानों को यूरोपीय शोध फंडिंग के माध्यम से संयुक्त अकादमिक अनुसंधान के अवसर मिल सकते हैं।
प्रोफेसर जोशी के अनुसार, न्यूजीलैंड के साथ समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है। इसमें सेवाओं के 118 उपक्षेत्रों में बाजार पहुंच, आयुष और पारंपरिक चिकित्सा के लिए विशेष प्रावधान तथा निवेश और पेशेवरों की आवाजाही से जुड़े अवसर शामिल हैं।
जामनगर रिफाइनरी पहुंचकर रुबियो ने भारत की क्षमता को सराहा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी का दौरा किया। इस यात्रा का उद्देश्य भारी वेनेजुएला के कच्चे तेल के प्रसंस्करण में सहयोग को मजबूत करना बताया गया। रुबियो ने भारत को रिफाइनिंग क्षेत्र की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि दुनिया में कुछ ही रिफाइनरियां उच्च सल्फर वाले भारी कच्चे तेल को प्रभावी ढंग से संसाधित कर सकती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल थी और अमेरिका में डीजल की कीमतें भी ऊंची बनी हुई थीं। ऐसे माहौल में भारत की रिफाइनिंग क्षमता अमेरिकी ऊर्जा रणनीति के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।
रिलायंस की टेक्सास के ब्राउन्सविल में प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना का मूल्य 300 अरब डॉलर बताया गया, हालांकि प्रोफेसर जोशी ने वास्तविक रिफाइनरी निवेश को लगभग 5 अरब डॉलर के करीब बताया। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की आपूर्ति और बाजारों की निकटता को देखते हुए अमेरिका में रिफाइनरी परियोजना व्यावसायिक रूप से उपयोगी हो सकती है।
फ्रांस में हिंसा से कारोबार और अर्थव्यवस्था प्रभावित
फ्रांस में शिक्षकों की कमी और पुराने स्कूलों की स्थिति को लेकर शुरू हुए छात्र प्रदर्शनों ने व्यापक हिंसा का रूप ले लिया। रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा से 3,000 से अधिक कारोबार प्रभावित हुए हैं। मॉर्निंगस्टार DBRS ने बीमा कंपनियों को होने वाले संभावित नुकसान का अनुमान 1.34 अरब डॉलर तक लगाया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अशांति के लिए आव्रजन को जिम्मेदार ठहराया, जिसके बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उनकी टिप्पणियों को अस्वीकार्य और मूर्खतापूर्ण बताया। मैक्रों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार भ्रामक सामग्री के जरिए बड़े पैमाने पर प्रवासी घुसपैठ की झूठी तस्वीरें फैलाए जाने को लेकर भी चेतावनी दी।
फ्रांस की आर्थिक स्थिति भी दबाव में है। रिपोर्ट में देश का सार्वजनिक कर्ज 4.08 ट्रिलियन डॉलर, यानी GDP का 119 प्रतिशत बताया गया है। वर्ष 2025 में सरकारी खर्च अर्थव्यवस्था के कुल उत्पादन का लगभग 57 प्रतिशत था। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने फ्रांस की आर्थिक वृद्धि दर 0.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। हिंसा के बीच देश की उधारी लागत भी 24 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
तीनों घटनाक्रमों से क्या संकेत मिलते हैं?
भारत-न्यूजीलैंड FTA भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलने के साथ संवेदनशील कृषि क्षेत्रों की सुरक्षा पर भी जोर देता है। रुबियो की जामनगर यात्रा वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की रिफाइनिंग क्षमता के महत्व को दिखाती है। वहीं, फ्रांस में जारी अशांति बताती है कि शिक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक वित्त और राजनीतिक तनाव से जुड़ी समस्याएं अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर डाल सकती हैं।
