केंद्र ने पेट्रोल निर्यात शुल्क हटाया, डीजल और ATF पर बढ़ाया शुल्क

केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन (ATF) के निर्यात शुल्क में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय की ओर से शनिवार को जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क पूरी तरह हटा दिया गया है। वहीं, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर निर्यात शुल्क बढ़ा दिया गया है।

नई दरों के तहत अब पेट्रोल के निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इससे पहले पेट्रोल पर 2.50 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लागू था। दूसरी ओर, डीजल पर शुल्क 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 10.50 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

पेट्रोल निर्यात पर अब शून्य शुल्क

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क समाप्त कर दिया गया है। पहले इस पर 2.50 रुपये प्रति लीटर की दर से शुल्क वसूला जा रहा था। नई व्यवस्था के बाद पेट्रोल निर्यातकों को इस शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। इसी के मद्देनजर सरकार ईंधन निर्यात शुल्क की हर पखवाड़े समीक्षा कर रही है।

डीजल और ATF के निर्यात पर बढ़ा शुल्क

सरकार ने डीजल और विमानन ईंधन के निर्यात पर शुल्क में बढ़ोतरी की है। संशोधित दरों के अनुसार:

  • पेट्रोल: 2.50 रुपये से घटाकर शून्य प्रति लीटर।
  • डीजल: 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर।
  • ATF: 10.50 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर।

इन बदलावों के साथ सरकार ने अलग-अलग पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर शुल्क की दरों में संशोधन किया है।

अक्टूबर के फैसले में भी हुआ था बदलाव

यह संशोधन अक्टूबर में किए गए बदलावों को आंशिक रूप से पलटता है। उस समय सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 0.50 रुपये से बढ़ाकर 2.50 रुपये प्रति लीटर किया था। वहीं, डीजल पर शुल्क 16 रुपये से घटाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था।

पिछले कुछ महीनों में ईंधन निर्यात शुल्क की दरों में कई बार संशोधन किया गया है। सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों और घरेलू जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए इन दरों की समीक्षा कर रही है।

मार्च 2026 में दोबारा लागू किए गए थे निर्यात शुल्क

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बाद मार्च 2026 में ईंधन निर्यात शुल्क दोबारा लागू किए गए थे। उस समय क्षेत्रीय तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई थी और ऊर्जा आपूर्ति के स्थापित मार्ग भी प्रभावित हुए थे।

सरकार ने इन शुल्कों का उद्देश्य घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना बताया था। इसके तहत रिफाइनरियों को उन परिस्थितियों में ईंधन का निर्यात करने से हतोत्साहित करने का प्रयास किया गया, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात से अधिक मुनाफा मिलने की संभावना हो।

नवीनतम बदलाव भी घरेलू ईंधन आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार की बदलती परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाने की इसी नीति का हिस्सा है।

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