अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष तथा खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र तेजी रही। ब्रेंट क्रूड करीब 1.79 प्रतिशत यानी 1.76 डॉलर बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 1.88 प्रतिशत या 1.75 डॉलर की बढ़त के साथ 94.78 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
तेल बाजार में मौजूदा तेजी के पीछे मध्य पूर्व में बढ़ती सैन्य गतिविधियों को प्रमुख वजह माना जा रहा है। पिछले छह महीनों से जारी संघर्ष के स्थायी समाधान की उम्मीद कमजोर पड़ने के साथ क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है। अगस्त की शुरुआत से ब्रेंट की कीमत में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो चुकी है।
बाजार में मंगलवार को सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्से में चार शहरों पर ईरान समर्थित हूती बलों के हमलों की खबर सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, हमलों में 70 से अधिक लोग घायल हुए और कुछ तेल प्रतिष्ठानों में आग लग गई। इसके जवाब में सऊदी अरब की ओर से यमन के जुबा जिले और ताइज प्रांत में हवाई हमले किए जाने की जानकारी सामने आई।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में दो अमेरिकी विध्वंसक जहाजों और जॉर्डन के अल-अजराक स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। जॉर्डन की सेना के अनुसार, ईरान से दागी गई 20 में से 18 मिसाइलों को वायु रक्षा प्रणाली ने रोक लिया, जबकि दो आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। किसी के हताहत होने की सूचना नहीं दी गई।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी दी कि अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमलों के जवाब में वॉशिंगटन ईरानी तेल टैंकरों पर कार्रवाई जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश होने पर ईरान को टैंकरों के नुकसान का सामना करना पड़ेगा।
ब्रेंट और WTI दोनों तकनीकी रूप से ओवरबॉट क्षेत्र में बने हुए हैं। ब्रेंट का पिछला बंद भाव 23 जुलाई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर रहा, जबकि WTI का बंद भाव 4 जून के बाद सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गया।
बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव तेल बाजार में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ा रहा है। यदि खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष और तेज होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव और बढ़ने की आशंका है।
