भारत के कॉयर और कॉयर उत्पादों के निर्यात में पिछले वित्त वर्ष के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अनुसार, देश का कॉयर निर्यात वित्त वर्ष 2014-15 के 1,630.33 करोड़ रुपये से बढ़कर पिछले वित्त वर्ष में 6,614.40 करोड़ रुपये हो गया। इस तरह निर्यात में करीब 305 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि भारत के कॉयर उद्योग की वैश्विक बाजार में बढ़ती पहुंच और इस क्षेत्र में विकसित हो रहे उद्यमों को दर्शाती है।
मंत्रालय ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में 21,000 से अधिक कॉयर इकाइयों ने उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है। इससे लगभग 2.30 लाख लोगों को रोजगार मिला है और इन इकाइयों को औपचारिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिली है।
21 हजार से अधिक कॉयर इकाइयां पंजीकृत
MSME मंत्रालय के मुताबिक, कॉयर क्षेत्र में उद्यम पंजीकरण बढ़ने से इस उद्योग से जुड़ी इकाइयों को औपचारिक कारोबारी व्यवस्था का हिस्सा बनने में मदद मिली है। इस प्रक्रिया से क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमों और रोजगार से जुड़े लोगों की पहचान तथा उनके औपचारिक आर्थिक ढांचे में शामिल होने का दायरा बढ़ा है।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि कॉयर उद्योग में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के तहत 68,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया है। इनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक रही है। यह आंकड़ा इस क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी को दर्शाता है।
कॉयर उद्योग में प्रशिक्षण के साथ-साथ उत्पादन तकनीक और उत्पाद विकास पर भी काम किया गया है। मंत्रालय के अनुसार, इस क्षेत्र में 150 से अधिक नई मशीनों, तकनीकों और मूल्यवर्धित उत्पादों का विकास हुआ है। इन नवाचारों का उद्देश्य उत्पादन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना और कॉयर आधारित उत्पादों की विविधता बढ़ाना है।
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 20 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता
कॉयर उत्पादों के विदेशी बाजारों में विस्तार के लिए सरकार ने निर्यात बाजार संवर्धन योजना के तहत वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई है। MSME मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत 850 से अधिक उद्यमियों को 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता दी गई है।
निर्यात बाजार संवर्धन से जुड़ी सहायता का उद्देश्य कॉयर क्षेत्र के उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद देना है। इससे कारोबारियों को अपने उत्पादों के निर्यात और विदेशी बाजारों में व्यापार बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।
निर्यात में हुई वृद्धि के साथ पंजीकरण, प्रशिक्षण, तकनीकी विकास और वित्तीय सहायता जैसे प्रयास इस क्षेत्र की प्रगति के प्रमुख पहलुओं के रूप में सामने आए हैं।
वैश्विक कॉयर उत्पादन में भारत की बड़ी हिस्सेदारी
भारत दुनिया में कॉयर का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है। मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक कॉयर उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई है। भारतीय कॉयर उद्योग का कुल कारोबार करीब 16,000 करोड़ रुपये बताया गया है और यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग एक प्रतिशत योगदान देता है।
कॉयर नारियल के बाहरी रेशेदार छिलके से प्राप्त होने वाला प्राकृतिक रेशा है। इससे विभिन्न औद्योगिक और घरेलू उपयोग के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। भारत से निर्यात होने वाले प्रमुख कॉयर उत्पादों में कॉयर पिथ, कॉयर फाइबर, कॉयर यार्न और टफ्टेड मैट शामिल हैं।
कॉयर पिथ का उपयोग विभिन्न उत्पादों में किया जाता है, जबकि कॉयर फाइबर और यार्न से रेशे आधारित वस्तुएं तैयार की जाती हैं। टफ्टेड मैट भी भारतीय कॉयर उत्पादों की प्रमुख निर्यात श्रेणियों में शामिल हैं।
रोजगार और निर्यात में कॉयर उद्योग की भूमिका
निर्यात में 305 प्रतिशत की वृद्धि, 21,000 से अधिक इकाइयों का पंजीकरण और हजारों लोगों को प्रशिक्षण इस क्षेत्र के विस्तार को रेखांकित करते हैं। विशेष रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महिलाओं की 80 प्रतिशत से अधिक भागीदारी कॉयर उद्योग में उनकी भूमिका को उजागर करती है।
MSME मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत का कॉयर उद्योग निर्यात, रोजगार, तकनीकी नवाचार और उद्यमिता के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है। आने वाले समय में इस उद्योग की प्रगति का आकलन निर्यात प्रदर्शन, नए उत्पादों के विकास और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग के आधार पर किया जा सकेगा।
