Connect with us

International Relations

भारत-जर्मनी साझेदारी: वैश्विक अनिश्चितता के बीच एक सामरिक संपत्ति

Published

on

SamacharToday.co.in - भारत-जर्मनी साझेदारी वैश्विक अनिश्चितता के बीच एक सामरिक संपत्ति - Image Credited by News18

वैश्विक कूटनीति की बदलती परिस्थितियों को रेखांकित करते हुए, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ सोमवार को दो दिवसीय उच्च-स्तरीय यात्रा पर भारत पहुंचे। गांधीनगर में ‘भारत-जर्मनी सीईओ फोरम’ को संबोधित करते हुए, मर्ज़ ने दोनों देशों के बीच की साझेदारी को एक “रणनीतिक संपत्ति” (strategic asset) बताया, जो भू-राजनीतिक अस्थिरता और तकनीकी व्यवधान के वर्तमान युग से निपटने के लिए अनिवार्य है।

यह यात्रा बर्लिन की “भारत की ओर झुकाव” (Pivot to India) की नीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि मर्ज़ ने कार्यभार संभालने के बाद अपनी पहली एशियाई यात्रा के लिए भारत को चुना है। उनकी टिप्पणियाँ यूरोप के इस बढ़ते अहसास को दर्शाती हैं कि भारत अब केवल एक बाज़ार नहीं, बल्कि उभरती वैश्विक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

इंडो-पैसिफिक की ओर झुकाव: भारत क्यों महत्वपूर्ण है?

चांसलर की यह यात्रा ऐसे मोड़ पर हो रही है जब जर्मनी अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं (supply chains) को चीन से हटाकर आक्रामक रूप से विविधता ला रहा है और भरोसेमंद लोकतांत्रिक भागीदारों की तलाश कर रहा है। मर्ज़ ने इस बात पर जोर दिया कि उनके पहले एशियाई दौरे के लिए भारत का चुनाव जानबूझकर किया गया था और यह एक गहरे संरचनात्मक तालमेल का प्रतीक है।

“यह कोई संयोग नहीं है कि चांसलर के रूप में मैं जिस पहले एशियाई देश का दौरा कर रहा हूँ, वह भारत है,” मर्ज़ ने शीर्ष व्यापारिक नेताओं की सभा को बताया। “तकनीकी परिवर्तन और भू-राजनीतिक अनिश्चितता हमारी अर्थव्यवस्थाओं के संचालन और प्रतिस्पर्धा करने के तरीके को प्रभावित करती है। इस पृष्ठभूमि में, भारत और जर्मनी के बीच की साझेदारी आर्थिक, राजनीतिक और वैश्विक संदर्भ में एक रणनीतिक संपत्ति है।”

आर्थिक तालमेल और हरित साझेदारी

गांधीनगर में चर्चा का मुख्य केंद्र ‘हरित और सतत विकास साझेदारी’ (GSDP) पर रहा, जिस पर दोनों देशों के बीच पहले हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। यूरोप की औद्योगिक महाशक्ति जर्मनी, भारत को हाई-टेक विनिर्माण, हरित हाइड्रोजन सहयोग और कुशल प्रवासन (skilled migration) के लिए एक प्राथमिक गंतव्य के रूप में देख रहा है।

वर्तमान में, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड ऊंचाई पर है और भारत में 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं। मर्ज़ ने भारतीय और जर्मन सीईओ से सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग गहरा करने का आग्रह किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि तीव्र तकनीकी बदलावों के बीच दोनों अर्थव्यवस्थाएं प्रतिस्पर्धी बनी रहें।

वैश्विक संकटों पर कड़ा रुख: ईरान का संदर्भ

हालाँकि फोरम का प्राथमिक केंद्र आर्थिक था, लेकिन मर्ज़ मध्य पूर्व में बढ़ते मानवाधिकार संकट को संबोधित करने से पीछे नहीं हटे। ईरान में जारी अशांति का संदर्भ देते हुए, चांसलर ने तेहरान के शासन को कड़ी चेतावनी दी, जो जर्मन विदेश नीति में एक सख्त रुख का संकेत है।

मर्ज़ ने कहा, “ईरानी लोगों के खिलाफ निर्देशित हिंसा ताकत का नहीं, बल्कि कमजोरी का संकेत है और इसे रुकना चाहिए।” उन्होंने ईरानी सरकार से अपने नागरिकों को सताने के बजाय उनकी रक्षा करने का आह्वान किया। उनकी यह टिप्पणी उन रिपोर्टों के बीच आई है जिनमें ईरानी विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़ने की बात कही गई है, जो अब अपने 15वें दिन में प्रवेश कर चुके हैं।

“जर्मनी और भारत नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में समान रुचि रखते हैं। हमारी साझेदारी लोकतंत्र और कानून के शासन के साझा मूल्यों पर बनी है, जो वैश्विक शांति के लिए एकमात्र स्थायी आधार हैं।” — चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़

भारत-जर्मनी रणनीतिक संबंधों का विकास

ऐतिहासिक रूप से, भारत और जर्मनी के बीच साल 2000 से “रणनीतिक साझेदारी” रही है। हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में ‘अंतर-सरकारी परामर्श’ (IGC) के माध्यम से इस रिश्ते को अभूतपूर्व गति मिली है—यह एक अनूठी व्यवस्था है जहाँ दोनों पक्षों के कैबिनेट मंत्री नीतियों में तालमेल बिठाने के लिए मिलते हैं।

यूक्रेन संघर्ष के भू-राजनीतिक झटकों और उसके बाद यूरोप में पैदा हुए ऊर्जा संकट के बाद, जर्मनी ने अपने सुरक्षा ढांचे को फिर से परिभाषित करने की कोशिश की है। इसके कारण इंडो-पैसिफिक में जर्मन नौसेना की उपस्थिति बढ़ी है और नई दिल्ली के साथ रक्षा सहयोग में गहरी रुचि पैदा हुई है, जिसमें P-75I पनडुब्बियों और विमान इंजनों के लिए संभावित सौदे शामिल हैं।

व्यापार से पूर्ण तालमेल की ओर

चांसलर मर्ज़ की गांधीनगर यात्रा एक स्पष्ट संकेत है कि भारत-जर्मनी संबंध एक लेन-देन वाले व्यापारिक संबंध से परिपक्व होकर एक व्यापक रणनीतिक गठबंधन बन गए हैं। जैसे-जैसे दोनों देश भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं, मर्ज़ द्वारा वर्णित “रणनीतिक संपत्ति” एक तेजी से अनिश्चित होती दुनिया में स्थिरता की आधारशिला बनने के लिए तैयार है।

जैसे ही मर्ज़ अपनी यात्रा समाप्त करेंगे, ध्यान इस बात पर केंद्रित होगा कि ये उच्च-स्तरीय बयान जमीनी स्तर के निवेश और संयुक्त रक्षा परियोजनाओं में कैसे बदलते हैं जो क्षेत्रीय प्रभुत्व को संतुलित कर सकें।

देवाशीष पेशे से इंजीनियर हैं और वर्ष 2017 से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्हें 2017 से पत्रकारिता में निरंतर अनुभव प्राप्त है, जिसके आधार पर उन्होंने डिजिटल और समाचार जगत में अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है। उन्हें राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक विषयों पर गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टि के लिए जाना जाता है। भारतीय जनता पार्टी (BJP), संसद, केंद्र सरकार और नीति-निर्माण से जुड़े मामलों पर उनकी पैनी नज़र रहती है। उनकी मुख्य रुचि और विशेषज्ञता अंतरराष्ट्रीय समाचारों, प्रबंधन, व्यापार (बिज़नेस) और खेल जगत की कवरेज में रही है। इसके साथ ही वे सीमित रूप से राजनीति और न्यूज़ प्लेसमेंट से जुड़े विषयों को भी कवर करते हैं। Samachar Today में देवाशीष का फोकस वैश्विक घटनाक्रम, आर्थिक गतिविधियों, खेल समाचारों और रणनीतिक विषयों पर निष्पक्ष, तथ्य-आधारित और संतुलित रिपोर्टिंग प्रदान करना है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © 2017-2026 SamacharToday.