केंद्र सरकार ने कहा है कि IndiaAI Mission का Safe & Trusted AI पिलर देश में सुरक्षित, निष्पक्ष और जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास को बढ़ावा दे रहा है। सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य नागरिकों का AI तकनीक पर भरोसा मजबूत करना और भारत को वैश्विक AI गवर्नेंस में अग्रणी भूमिका दिलाना है। इसी दिशा में अब तक 13 जिम्मेदार AI परियोजनियों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें डीपफेक की पहचान, एल्गोरिदमिक पक्षपात (Bias) कम करने और गोपनीयता आधारित AI तकनीकों पर काम किया जा रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने बताया कि मार्च 2024 में स्वीकृत IndiaAI Mission के लिए अगले पांच वर्षों में 10,371 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस मिशन का उद्देश्य देश में व्यापक AI इकोसिस्टम तैयार करना, रोजगार और आर्थिक अवसर बढ़ाना तथा AI से जुड़े संभावित जोखिमों का समाधान करना है। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “Technology for All” और AI को लोकतांत्रिक बनाने के विजन के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है।
मंत्रालय के अनुसार, मिशन के तहत IndiaAI Compute, Foundation Models, AIKosh, Application Development Initiative, FutureSkills, Startup Financing और Safe & Trusted AI सहित सात प्रमुख स्तंभों पर कार्य किया जा रहा है। सरकार ने स्वदेशी Large Language Models (LLMs) और Small Language Models (SLMs) विकसित करने वाले भारतीय स्टार्टअप और संस्थानों को भी समर्थन दिया है। अब तक 20 स्वदेशी AI मॉडल प्रस्तावों को सहायता के लिए चुना गया है, जिनमें 12 LLM और 8 SLM शामिल हैं।
इन परियोजनाओं में Sarvam AI के 30 और 105 अरब पैरामीटर वाले भाषा मॉडल, Gnani.AI का स्पीच-टू-स्पीच मॉडल, BharatGen के बहुभाषी फाउंडेशन मॉडल और Avataar AI का वीडियो जनरेशन मॉडल प्रमुख हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं, भारतीय भाषाओं और एजेंटिक AI सिस्टम से जुड़े कई विशेष AI मॉडल भी विभिन्न चरणों में विकसित किए जा रहे हैं।
AI कंप्यूटिंग को अधिक सुलभ बनाने के लिए सरकार ने 15 कंप्यूट सेवा प्रदाताओं को सूचीबद्ध किया है। इसके माध्यम से 237 AI परियोजनियों को सहायता दी गई है और 93 लाख GPU घंटे स्वीकृत किए गए हैं। वहीं Application Development Initiative के तहत 12 राष्ट्रीय हैकाथॉन और नवाचार प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनसे 62 AI प्रोटोटाइप विकसित हुए और 20 AI आधारित समाधान लागू किए जा चुके हैं।
AI शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी मिशन ने उल्लेखनीय प्रगति की है। मंत्रालय के अनुसार, 178 संस्थानों में स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर 686 फेलोशिप प्रदान की गई हैं। इसके अलावा YUVA AI for All कार्यक्रम के माध्यम से 26 लाख से अधिक लोग प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। देशभर में 27 India Data and AI Labs स्थापित किए गए हैं, जहां 2,500 से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 188 नए लैब स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 58 AI Centres of Excellence भी विकसित किए जा रहे हैं।
Safe & Trusted AI पिलर के तहत स्वीकृत 13 परियोजनियां डीपफेक पहचान, AI जोखिम मूल्यांकन, Explainable AI, Privacy-Preserving AI, Machine Unlearning और Bias Mitigation जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। इनमें IIT जोधपुर और IIT मद्रास द्वारा विकसित ‘Saakshya’ फ्रेमवर्क, AI Vishleshak परियोजना तथा IIT खड़गपुर की रियल-टाइम वॉयस डीपफेक डिटेक्शन प्रणाली शामिल हैं। वहीं NIT रायपुर, IIT दिल्ली, IIIT दिल्ली, IIT धारवाड़ और DIAT भी सुरक्षित और पारदर्शी AI तकनीकों पर अनुसंधान कर रहे हैं।
राज्यसभा में 24 जुलाई को लिखित उत्तर में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने IndiaAI Safety Institute की स्थापना भी की है, जो AI सुरक्षा और गवर्नेंस से जुड़े शोध को बढ़ावा देगा। साथ ही India AI Governance Guidelines के तहत एल्गोरिदमिक पक्षपात, डीपफेक, गलत सूचना और AI से जुड़े सामाजिक जोखिमों के समाधान के लिए जोखिम-आधारित ढांचा तैयार किया गया है। सरकार का कहना है कि “AI for All” की सोच के साथ भारत नवाचार, जिम्मेदार AI और समावेशी विकास के बीच संतुलन बनाते हुए वैश्विक AI गवर्नेंस में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
