रिलायंस को सबसे बड़ी चोट; शीर्ष 9 कंपनियों का एमकैप घटा

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भारतीय शेयर बाजारों के लिए पिछला सप्ताह काफी उथल-पुथल भरा रहा। देश की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से नौ के बाजार पूंजीकरण (mcap) में सामूहिक रूप से ₹2,51,711.6 करोड़ की भारी गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट दलाल स्ट्रीट में छाई व्यापक मंदी के अनुरूप है, जो मुख्य रूप से विदेशी फंडों की निरंतर निकासी और कंपनियों की सुस्त आय के कारण देखी गई।

भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स, पांच कारोबारी सत्रों में 2,032.65 अंक यानी 2.43 प्रतिशत टूट गया। हालांकि गिरावट सभी क्षेत्रों में देखी गई, लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज सबसे पिछड़ी कंपनी के रूप में उभरी, जिसने अपने मूल्य में लगभग ₹97,000 करोड़ खो दिए।

भालुओं (Bears) के नियंत्रण में रहा सप्ताह

बाजार विश्लेषकों ने नकारात्मक कारकों के एक ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ की ओर इशारा किया जिसने निवेशकों के उत्साह को ठंडा कर दिया। इसमें विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार बिकवाली, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का निरंतर गिरना और तिमाही नतीजों की निराशाजनक शुरुआत प्रमुख कारण रहे।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के शोध विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (SVP) अजीत मिश्रा ने स्थिति का आकलन करते हुए कहा: “सप्ताह के दौरान बाजारों में तेज बिकवाली देखी गई और भालू (Bears) पूरी तरह नियंत्रण में रहे। कमजोर वैश्विक संकेतों, निरंतर एफआईआई निकासी, रुपये के मूल्यह्रास और सुस्त कॉर्पोरेट आय ने पूरे सप्ताह दबाव को उच्च बनाए रखा।”

मूल्यांकन में गिरावट: किसे कितना हुआ नुकसान?

बाजार पूंजीकरण में इस गिरावट का नेतृत्व ऊर्जा-से-टेलीकॉम क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने किया। इसका मूल्यांकन ₹96,960.17 करोड़ घटकर ₹18,75,533.04 करोड़ रह गया। शीर्ष कंपनियों को हुए कुल नुकसान का एक बड़ा हिस्सा अकेले इसी कंपनी के खाते में आया।

बैंकिंग क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण दबाव का सामना करना पड़ा। आईसीआईसीआई बैंक के मूल्यांकन में ₹48,644.99 करोड़ की कमी आई और यह ₹9,60,825.29 करोड़ रह गया। वहीं, देश के सबसे बड़े निजी ऋणदाता एचडीएफसी बैंक के एमकैप में ₹22,923.02 करोड़ की गिरावट दर्ज की गई।

अन्य प्रमुख घाटे वाली कंपनियां:

  • भारती एयरटेल: ₹17,533.97 करोड़ की कमी के साथ ₹11,32,010.46 करोड़।

  • टीसीएस (TCS): ₹16,588.93 करोड़ गिरकर ₹11,43,623.19 करोड़।

  • लार्सन एंड टुब्रो (L&T): ₹15,248.32 करोड़ घटकर ₹5,15,161.91 करोड़।

  • बजाज फाइनेंस: ₹14,093.93 करोड़ गिरकर ₹5,77,353.23 करोड़।

  • भारतीय स्टेट बैंक (SBI): ₹11,907.5 करोड़ की गिरावट के साथ ₹9,50,199.77 करोड़।

  • इंफोसिस: ₹7,810.77 करोड़ टूटकर ₹6,94,078.82 करोड़।

बाजार के इस रुख के विपरीत, एफएमसीजी (FMCG) दिग्गज हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) शीर्ष 10 में एकमात्र लाभ कमाने वाली कंपनी रही। इसका एमकैप ₹12,311.86 करोड़ बढ़कर ₹5,66,733.16 करोड़ पर पहुंच गया, क्योंकि भारी अस्थिरता के बीच निवेशकों ने सुरक्षित माने जाने वाले ‘डिफेंसिव’ शेयरों का सहारा लिया।

बाजार मूल्यांकन के आधार पर शीर्ष 10 कंपनियां (रैंकिंग)

रैंक कंपनी पिछले सप्ताह की स्थिति
1 रिलायंस इंडस्ट्रीज सर्वाधिक मूल्यवान (नुकसान)
2 एचडीएफसी बैंक दूसरा सर्वाधिक मूल्यवान (नुकसान)
3 टीसीएस (नुकसान)
4 भारती एयरटेल (नुकसान)
5 आईसीआईसीआई बैंक (नुकसान)
6 भारतीय स्टेट बैंक (नुकसान)
7 इंफोसिस (नुकसान)
8 बजाज फाइनेंस (नुकसान)
9 हिंदुस्तान यूनिलीवर (लाभ)
10 लार्सन एंड टुब्रो (नुकसान)

मैक्रो-इकनॉमिक (वृहत आर्थिक) परिदृश्य

भारतीय बाजारों में यह अस्थिरता कोई अलग घटना नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक बदलावों का प्रतिबिंब है। विदेशी संस्थागत निवेशक पिछले कई हफ्तों से भारतीय बाजार में शुद्ध विक्रेता रहे हैं। उनका रुझान अमेरिका में उच्च बॉन्ड यील्ड और चीन जैसे अन्य उभरते बाजारों में अधिक आकर्षक मूल्यांकन की ओर बढ़ा है।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने उल्लेख किया: “यह सुधार कई कारकों के मेल से हुआ: बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, आक्रामक एफआईआई बिकवाली और रुपये की कमजोरी को लेकर घबराहट।”

बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) को समझना

बाजार पूंजीकरण किसी कंपनी के बकाया शेयरों का कुल बाजार मूल्य होता है। इसकी गणना कंपनी के कुल बकाया शेयरों को एक शेयर की वर्तमान बाजार कीमत से गुणा करके की जाती है। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए, शीर्ष स्तर की कंपनियों का एमकैप निवेशकों के भरोसे और कॉर्पोरेट क्षेत्र के समग्र स्वास्थ्य की नब्ज के रूप में कार्य करता है। जब शीर्ष 10 कंपनियां एक साथ मूल्य खोती हैं, तो यह अक्सर बाजार चक्र में संरचनात्मक बदलाव या प्रणालीगत आर्थिक जोखिमों के प्रति प्रतिक्रिया का संकेत होता है।

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