प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को विक्रम-1 रॉकेट की सफल लॉन्चिंग को भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता और निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में युवाओं की प्रतिभा का प्रमाण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा स्पेस सेक्टर को निजी भागीदारी के लिए खोलने का फैसला अब उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है।
अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें संस्करण को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले रविवार विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग के बाद पूरा देश गर्व से भर गया है। उन्होंने कहा कि यह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण क्षण है क्योंकि विक्रम-1 देश का पहला निजी क्षेत्र द्वारा विकसित रॉकेट है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “विक्रम-1 की सफलता ने हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। यह केवल एक रॉकेट का प्रक्षेपण नहीं, बल्कि भारत के वैज्ञानिक कौशल, नवाचार और आत्मनिर्भरता की नई पहचान है।”
उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय देश के युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और नवाचारकर्ताओं को देते हुए कहा कि उन्होंने वह कर दिखाया, जिसकी कभी कल्पना करना भी कठिन माना जाता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं ने अपनी प्रतिभा, समर्पण, धैर्य और मेहनत से यह साबित कर दिया है कि भारत वैश्विक अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लंबे समय तक भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए पूरी तरह खुला नहीं था। इसके कारण कई प्रतिभाशाली युवा अपने विचारों और तकनीकी क्षमताओं को प्रदर्शित करने का अवसर नहीं पा रहे थे। सरकार ने युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए स्पेस सेक्टर में निजी भागीदारी की अनुमति देने का फैसला किया, जिससे स्टार्टअप और निजी कंपनियों के लिए नए अवसर उपलब्ध हुए।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत के इस फैसले के सकारात्मक परिणाम देख रही है। निजी क्षेत्र की भागीदारी से अंतरिक्ष तकनीक में नवाचार को बढ़ावा मिला है और देश में नई पीढ़ी के उद्यमियों को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने का अवसर मिला है। इससे भारत का स्पेस इकोसिस्टम पहले की तुलना में अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बन रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल अंतरिक्ष मिशनों में सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में युवाओं को वैश्विक स्तर पर नेतृत्व प्रदान करना भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारतीय निजी स्पेस कंपनियां नई उपलब्धियां हासिल करेंगी और देश को अंतरिक्ष अनुसंधान तथा तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएंगी।
उन्होंने कहा कि विक्रम-1 की सफलता इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सही नीतियों, नवाचार को प्रोत्साहन और युवाओं पर भरोसे के साथ भारत भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों में दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
