सोना-चांदी में जबरदस्त उछाल, शांति समझौते की उम्मीद से निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

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वैश्विक बाजारों में सोना और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा संभावित शांति समझौते की खबरों के बाद निवेशकों की गतिविधियों में बदलाव आया है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने भी कीमती धातुओं को मजबूती प्रदान की है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमत में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार के दौरान सोना लगभग 2.3 प्रतिशत तक चढ़ गया और यह करीब 4,317 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं चांदी में और भी अधिक तेजी देखने को मिली, जहां इसकी कीमत लगभग 3.1 प्रतिशत बढ़कर 70 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई।

विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका-ईरान तनाव में कमी की संभावना और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद ने ऊर्जा बाजार में राहत पहुंचाई है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में चार प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। तेल कीमतों में नरमी से वैश्विक महंगाई को लेकर चिंताएं कुछ कम हुई हैं।

इस बीच अमेरिकी डॉलर इंडेक्स भी कमजोर हुआ और हाल के दिनों के निचले स्तरों के करीब पहुंच गया। डॉलर में कमजोरी आने पर सोना और चांदी जैसे डॉलर आधारित निवेश अन्य देशों के निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सस्ते हो जाते हैं, जिससे इनकी मांग बढ़ सकती है।

अंतरराष्ट्रीय रुझानों का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग ₹1,49,080 प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गई। वहीं 22 कैरेट सोना करीब ₹1,36,650 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता देखा गया।

चांदी की कीमतों में भी मजबूत तेजी दर्ज की गई। घरेलू बाजार में इसका भाव लगभग ₹2,59,900 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया, जिससे निवेशकों और ज्वेलरी कारोबारियों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोना और चांदी केवल आभूषण ही नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौरान महत्वपूर्ण निवेश विकल्प भी माने जाते हैं। इसलिए भू-राजनीतिक घटनाक्रम, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की दिशा और कच्चे तेल की कीमतें इनके भावों को प्रभावित करती रहती हैं।

फिलहाल निवेशकों की नजर मध्य पूर्व की स्थिति, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियों में और बदलाव आता है तो आने वाले दिनों में सोना और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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