जुलाई में अब तक एफपीआई ने लगाए 11,897 करोड़ रुपये, डेट मार्केट में भी निवेश जारी
लगातार चार महीने तक बिकवाली करने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदार (Net Buyers) बन गए हैं। ताजा डिपॉजिटरी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में 11,897 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सेमीकंडक्टर कारोबार में कमजोरी, भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों ने विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर से बढ़ाया है।
चार महीने की बिकवाली के बाद बदला रुख
एफपीआई ने पिछले चार महीनों तक लगातार भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकाली थी, लेकिन जुलाई में उनका रुख बदलता दिखाई दे रहा है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में सुस्ती के चलते विदेशी निवेशकों ने अपने निवेश का एक हिस्सा उभरते हुए बाजारों (Emerging Markets) की ओर स्थानांतरित किया है, जिसमें भारत प्रमुख निवेश गंतव्य बनकर उभरा है।
मजबूत आर्थिक संकेतकों से बढ़ा भरोसा
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत के सकारात्मक मैक्रोइकोनॉमिक संकेतकों, स्थिर आर्थिक वृद्धि और कंपनियों के मजबूत तिमाही वित्तीय परिणामों ने विदेशी निवेशकों की धारणा को मजबूत किया है। हालांकि, पिछले सप्ताह एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से 3,260 करोड़ रुपये की निकासी भी की, जिससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक परिस्थितियों के बीच निवेशक अभी भी सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।
डेट मार्केट में भी विदेशी निवेश जारी
इक्विटी बाजार के साथ-साथ भारत का डेट मार्केट भी विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। सरकार की कर (Taxation) नीति में बदलाव के बाद जुलाई में अब तक एफपीआई ने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के जरिए 7,492 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसके अलावा जनरल रूट के माध्यम से विदेशी निवेशकों ने 4,480 करोड़ रुपये के डेट सिक्योरिटीज खरीदे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिर ब्याज दरों, बेहतर बॉन्ड यील्ड और नीति संबंधी सुधारों के कारण भारतीय बॉन्ड बाजार विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में विदेशी निवेश का रुख वैश्विक ब्याज दरों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और भारतीय कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगा। यदि घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत बने रहते हैं और वैश्विक अनिश्चितता कम होती है, तो भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश का प्रवाह और बढ़ सकता है।
