सोना-चांदी लगातार दूसरे सप्ताह सस्ता, निवेशकों की बढ़ी चिंता

सोना-चांदी लगातार दूसरे सप्ताह सस्ता, निवेशकों की बढ़ी चिंता - SamacharToday.co.in

मजबूत अमेरिकी डॉलर और फेड की सख्त नीति की आशंका से बुलियन बाजार पर दबाव

घरेलू और वैश्विक बुलियन बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर सख्त रुख बनाए रखने की उम्मीदों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद डॉलर की मजबूती और ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण निवेशकों ने फिलहाल कीमती धातुओं से दूरी बनानी शुरू कर दी है, जिससे सोना और चांदी दोनों पर दबाव बना हुआ है।

एमसीएक्स पर सोना और चांदी दोनों में गिरावट

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोना वायदा में सप्ताह के दौरान 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के अंत में यह 1,40,906 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी वायदा कीमत में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 2,16,013 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू बाजार में गिरावट का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले कमजोर संकेत और निवेशकों की सतर्क रणनीति रही।

कॉमेक्स में भी कमजोर रहा रुख

अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार कॉमेक्स (COMEX) में भी सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली। अगस्त डिलीवरी वाला सोना वायदा सप्ताहभर में 2.3 प्रतिशत टूटकर 4,018.8 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर बंद हुआ। वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में सबसे अधिक कमजोरी देखने को मिली। इसका भाव सप्ताह के दौरान लगभग 6.4 प्रतिशत गिरकर 56.33 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर पहुंच गया।

किन कारणों से टूटा बुलियन बाजार?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोना और चांदी की कीमतों पर कई वैश्विक कारकों का एक साथ असर पड़ा है। सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना रहा, जिससे अन्य मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो गया। इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों को सुरक्षित बॉन्ड निवेश की ओर आकर्षित किया। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। इसी संभावना ने बुलियन बाजार में निवेशकों की खरीदारी को सीमित कर दिया।

आगे क्या रहेगी बाजार की दिशा?

विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, डॉलर इंडेक्स, ट्रेजरी यील्ड और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेगी। यदि वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है तो सोने में सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग फिर से बढ़ सकती है। हालांकि फिलहाल मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदों के चलते बुलियन बाजार में दबाव बना रहने की संभावना जताई जा रही है।

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