मनीला में वांग यी से मुलाकात के दौरान सीमा पर शांति, व्यापार संतुलन और सप्लाई चेन पर दिया जोर
नई दिल्ली/मनीला, 22 जुलाई: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मनीला में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) और ASEAN Regional Forum की बैठकों के दौरान चीन के पोलित ब्यूरो सदस्य एवं विदेश मंत्री वांग यी से द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान उन्होंने भारत-चीन संबंधों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की और क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
जयशंकर ने कहा कि अक्टूबर 2024 में कज़ान में दोनों देशों के नेताओं की मुलाकात के बाद भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष तियानजिन में नेताओं की बैठक ने भी इस दिशा को और मजबूती प्रदान की।
सीमा पर शांति को बताया सामान्य संबंधों की पहली शर्त
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और चीन के बीच सामान्य संबंधों के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सबसे महत्वपूर्ण पूर्व शर्त है। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2024 से दोनों पक्ष इस उद्देश्य को सुनिश्चित करने के लिए लगातार संवाद कर रहे हैं और भविष्य में भी इस दिशा में निरंतर प्रयास आवश्यक होंगे। उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े सभी द्विपक्षीय तंत्रों को पूरा समर्थन और प्रोत्साहन मिलना चाहिए ताकि दोनों देशों के बीच विश्वास और स्थिरता बनी रहे।
मतभेदों को विवाद बनने से रोकना जरूरी
जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन जैसे दो बड़े तथा पड़ोसी देशों के अपने-अपने राष्ट्रीय हित होना स्वाभाविक है। उन्होंने दोनों देशों के नेताओं के उस सिद्धांत को दोहराया कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए और इनका समाधान कूटनीतिक माध्यमों से किया जाना चाहिए।
व्यापार, बाजार पहुंच और सप्लाई चेन पर जताई चिंता
विदेश मंत्री ने कहा कि हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच संबंधों के सामान्यीकरण की दिशा में कई सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। इनमें सीधी उड़ानों की बहाली, वीजा व्यवस्था में सुधार, कैलाश मानसरोवर यात्रा की पुनः शुरुआत और सीमा व्यापार का फिर से शुरू होना शामिल है। हालांकि उन्होंने कहा कि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी भी ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय उत्पादों के लिए निष्पक्ष बाजार पहुंच, व्यापार असंतुलन और सप्लाई चेन की पूर्वानुमेयता को प्रमुख चिंता का विषय बताया। साथ ही आधिकारिक और लोगों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने तथा विभिन्न द्विपक्षीय तंत्रों की नियमित बैठकों पर भी जोर दिया।
BRICS सहयोग की सराहना, वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा
जयशंकर ने कहा कि इस वर्ष भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और उन्होंने विभिन्न BRICS गतिविधियों एवं पहलों में चीन द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां अत्यंत जटिल हैं। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों देशों के लिए क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर खुलकर विचार-विमर्श करना आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि आपसी सम्मान, साझा हितों और पारस्परिक संवेदनशीलता पर आधारित स्थिर एवं सहयोगात्मक संबंध न केवल दोनों देशों बल्कि बहुध्रुवीय एशिया और विश्व के लिए भी लाभदायक होंगे।
