International Trade
भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोना-चांदी में गिरावट, मजबूत डॉलर का भी पड़ा असर
वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखने की संभावनाओं के बीच बीते सप्ताह सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उससे जुड़े आर्थिक प्रभावों ने निवेशकों की रणनीति को प्रभावित किया, जिसके चलते दोनों कीमती धातुओं में दबाव देखने को मिला।
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों का ध्यान इस समय वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम पर केंद्रित है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तथा महंगाई का दबाव बना रहता है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। ऐसी स्थिति में डॉलर को मजबूती मिलती है, जिसका सीधा असर सोने और चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों की मांग पर पड़ता है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने के वायदा अनुबंध में सप्ताह के दौरान 2.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के अंत में सोने का भाव 1,43,478 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। सप्ताह भर के कारोबार में निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना रहा।
वहीं, चांदी में सोने की तुलना में अधिक कमजोरी देखने को मिली। एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाले चांदी के वायदा अनुबंध में 6.2 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और सप्ताह के अंत में इसका भाव 2,22,664 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। औद्योगिक मांग को लेकर बनी अनिश्चितता और वैश्विक बाजारों में कमजोर धारणा का असर चांदी की कीमतों पर साफ दिखाई दिया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स (COMEX) में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। अगस्त डिलीवरी वाला सोना वायदा सप्ताह के दौरान 0.3 प्रतिशत फिसलकर 4,113.7 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर बंद हुआ। इसी तरह सितंबर डिलीवरी वाली चांदी लगभग 1.5 प्रतिशत कमजोर होकर 60.16 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गई।
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर में मजबूती आने पर सोना और चांदी विदेशी निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत महंगे हो जाते हैं, जिससे इनकी वैश्विक मांग प्रभावित होती है। इसके अलावा, जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो निवेशक सोने के बजाय अधिक रिटर्न देने वाले वित्तीय साधनों की ओर रुख करते हैं। यही कारण है कि हाल के दिनों में कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल काफी हद तक अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, फेडरल रिजर्व की अगली नीति बैठक, डॉलर इंडेक्स की दिशा और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव और बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की मांग दोबारा बढ़ सकती है। वहीं, यदि डॉलर मजबूत बना रहता है और फेडरल रिजर्व सख्त मौद्रिक नीति जारी रखता है, तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
बाजार विश्लेषकों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर बनाए रखें। उनका मानना है कि निकट भविष्य में सर्राफा बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है और निवेश संबंधी निर्णय सोच-समझकर लेने की आवश्यकता होगी।
