केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत में फार्माकोविजिलेंस की यात्रा पिछले वर्षों में आत्मनिर्भरता का उल्लेखनीय उदाहरण रही है। उन्होंने नई दिल्ली में नेशनल फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया के सातवें संस्करण के विमोचन के दौरान यह बात कही।
अनुप्रिया पटेल ने बताया कि देश में इस समय 1,100 से अधिक एडवर्स ड्रग रिएक्शन (ADR) मॉनिटरिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। सरकार का लक्ष्य इस निगरानी व्यवस्था को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा स्तर तक विस्तार देने का है, ताकि दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों की पहचान और रिपोर्टिंग को और व्यापक बनाया जा सके।
WHO डेटाबेस में भारत की भागीदारी बढ़ी
मंत्री ने कहा कि दुनिया के 25 देश भारतीय फार्माकोपिया को मान्यता देते हैं और स्वीकार करते हैं। भारत अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के रोगी सुरक्षा डेटाबेस में भी फार्माकोविजिलेंस से संबंधित आंकड़े उपलब्ध करा रहा है।
उन्होंने बताया कि WHO को इस तरह के डेटा उपलब्ध कराने में भारत की स्थिति 2014 के 123वें स्थान से बढ़कर 2025 में आठवें स्थान पर पहुंच गई। यह उपलब्धि भारत की दवा सुरक्षा निगरानी व्यवस्था में हुए विस्तार को दर्शाती है।
फार्माकोविजिलेंस का उद्देश्य दवाओं के इस्तेमाल से होने वाली संभावित प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं और अन्य सुरक्षा संबंधी घटनाओं की निगरानी करना है। इसके जरिए दवाओं से जुड़े जोखिमों की पहचान और रोगी सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलती है।
लोगों से सेल्फ-मेडिकेशन से बचने की अपील
कार्यक्रम के दौरान अनुप्रिया पटेल ने नागरिकों से किसी भी प्रकार की सेल्फ-मेडिकेशन से बचने की अपील की। उन्होंने लोगों से चिकित्सकीय विशेषज्ञों द्वारा दी गई दवा और प्रिस्क्रिप्शन का पालन करने को कहा।
मंत्री ने यह भी आग्रह किया कि किसी दवा के इस्तेमाल के बाद अचानक या अप्रत्याशित साइड इफेक्ट सामने आने पर उसे नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना और संबंधित प्रतिकूल प्रतिक्रिया की जानकारी देना दवा सुरक्षा निगरानी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
