चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में हजारों लोगों ने सार्वजनिक प्रसारकों की फंडिंग व्यवस्था में बदलाव की सरकारी योजना के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री आंद्रेज बाबिश के नेतृत्व वाली सरकार की इस योजना के तहत सरकारी रेडियो और टेलीविजन को मिलने वाली आर्थिक सहायता का तरीका बदलने का प्रस्ताव है। प्रदर्शनकारियों और मीडिया की स्वतंत्रता से जुड़े लोगों को आशंका है कि इस बदलाव से सार्वजनिक मीडिया की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से प्रस्तावित मसौदे को वापस लेने और इस पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा कराने की मांग की। उनका विरोध संसद के निचले सदन में विधेयक पर तेजी से आगे बढ़ी प्रक्रिया के बाद तेज हुआ।
संसद में तेजी से आगे बढ़ी विधेयक की प्रक्रिया
प्रदर्शनकारियों की नाराजगी की एक प्रमुख वजह संसद में विधेयक पर चर्चा कराने का तरीका रहा। रिपोर्ट के अनुसार, सत्तारूढ़ गठबंधन ने दो दिन पहले संसद के निचले सदन में इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया। गठबंधन के सांसदों ने चर्चा शुरू कराई और विपक्षी सांसदों के बोलने के समय को सीमित कर दिया।
इसके बाद संसद ने सुबह 4 बजकर 36 मिनट पर विधेयक की तीन आवश्यक संसदीय रीडिंग में से पहली रीडिंग को मंजूरी दे दी। प्रदर्शनकारियों ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए विधेयक वापस लेने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री बाबिश से इस मुद्दे पर व्यापक सार्वजनिक बहस सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
सरकारी बजट से रेडियो और टेलीविजन को फंडिंग का प्रस्ताव
सरकार की नई योजना के तहत सार्वजनिक रेडियो और टेलीविजन को सीधे राज्य के बजट से वित्तपोषित करने का प्रस्ताव है। फिलहाल इन संस्थानों को व्यक्तियों, परिवारों और व्यवसायों द्वारा नियमित रूप से भुगतान की जाने वाली फीस से धन मिलता है।
प्रस्तावित व्यवस्था में सार्वजनिक मीडिया के कुल वित्तपोषण में लगभग 15 प्रतिशत की कटौती भी शामिल है। आलोचकों को आशंका है कि सरकारी बजट पर निर्भरता बढ़ने और फंडिंग घटने से मीडिया संस्थानों की स्वतंत्रता तथा कामकाज प्रभावित हो सकता है।
मीडिया कर्मचारियों ने हड़ताल का ऐलान किया
सार्वजनिक मीडिया से जुड़े कर्मचारियों ने इस मुद्दे पर अगले महीने की 3 तारीख को हड़ताल करने की घोषणा की है। उन्हें श्रमिक संगठनों, विश्वविद्यालयों के रेक्टरों, चर्चों, अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूहों और अन्य संगठनों का समर्थन मिल रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने अगले महीने की 15 तारीख को प्राग के लेटना पार्क में एक और बड़ी रैली आयोजित करने का संकल्प लिया है। उनका उद्देश्य प्रस्तावित फंडिंग बदलाव के खिलाफ विरोध दर्ज कराना और सार्वजनिक मीडिया की स्वतंत्रता से जुड़ी चिंताओं को सामने लाना है।
सरकार के गठबंधन की नीतियां भी चर्चा में
प्रधानमंत्री आंद्रेज बाबिश ने पिछले वर्ष दो छोटे राजनीतिक समूहों के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इन समूहों के एजेंडे में यूक्रेन को मिलने वाली सहायता कम करना और यूरोपीय संघ की कुछ प्रमुख नीतियों का विरोध करना शामिल है।
मीडिया फंडिंग योजना को लेकर जारी विरोध अब संसद में विधेयक की प्रक्रिया, सार्वजनिक प्रसारकों के वित्तपोषण और मीडिया की स्वतंत्रता से जुड़े व्यापक सवालों पर केंद्रित हो गया है। आने वाले दिनों में प्रस्ताव पर संसदीय प्रक्रिया और मीडिया कर्मचारियों की घोषित हड़ताल पर नजर रहेगी।
