एशियाई बाजारों में गिरावट, यूरोपीय शेयर सूचकांक बढ़त पर

एशियाई बाजारों में गिरावट, यूरोपीय शेयर सूचकांक बढ़त पर - SamacharToday.co.in

वैश्विक बाजारों में शुक्रवार को मिला-जुला रुख देखने को मिला। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई, जिससे अधिकांश एशियाई शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि, इसके विपरीत प्रमुख यूरोपीय शेयर बाजारों में कारोबार के दौरान मजबूती दर्ज की गई और प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए।

एशियाई बाजारों में सबसे बड़ी गिरावट दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स में देखने को मिली, जो 5.7 प्रतिशत लुढ़क गया। जापान का निक्केई 225 भी 2.7 प्रतिशत से अधिक टूटकर बंद हुआ। वहीं ताइवान का ताइएक्स करीब 2.7 प्रतिशत, चीन का शंघाई कंपोजिट 1.6 प्रतिशत और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। दूसरी ओर सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स मामूली 0.1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा।

विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर डाला। अनिश्चित माहौल के चलते निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाई, जिसका असर एशियाई शेयर बाजारों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला।

आर्थिक मोर्चे पर जापान से जारी आंकड़ों ने भी निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। जापान के सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Core CPI), जिसमें ताजा खाद्य पदार्थों की कीमतें शामिल नहीं होतीं, 1.6 प्रतिशत पर पहुंच गया। मई में यह आंकड़ा 1.4 प्रतिशत था। मार्च के बाद यह पहला अवसर है जब कोर महंगाई दर में तेजी दर्ज की गई है।

जापान की हेडलाइन महंगाई दर भी जून में बढ़कर 1.7 प्रतिशत हो गई, जबकि मई में यह 1.5 प्रतिशत थी। विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई में यह बढ़ोतरी भविष्य में बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति और ब्याज दर संबंधी फैसलों को प्रभावित कर सकती है।

वहीं यूरोप के प्रमुख शेयर बाजारों में सकारात्मक कारोबार देखने को मिला। जर्मनी का DAX इंडेक्स लगभग 0.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करता रहा। फ्रांस का CAC 40 करीब 0.4 प्रतिशत मजबूत हुआ, जबकि ब्रिटेन का FTSE 100 भी 0.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक आंकड़े, केंद्रीय बैंकों की नीतियां और भू-राजनीतिक घटनाक्रम निवेशकों की धारणा को प्रभावित करते रहेंगे। फिलहाल एशियाई बाजारों में दबाव और यूरोपीय बाजारों में मजबूती वैश्विक निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाती है।

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