संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि पहले लगाए गए अनुमानों से अधिक हो सकती है। संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यदि सभी देश अपनी मौजूदा जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा भी कर लेते हैं, तब भी वर्ष 2100 तक पृथ्वी का औसत तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर की तुलना में 2.6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।
यह अनुमान पिछले वर्ष जारी किए गए अनुमान से 0.2 डिग्री सेल्सियस अधिक है। रिपोर्ट में अमेरिका के पेरिस जलवायु समझौते से हटने को भी तापमान वृद्धि की आशंकाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कारक बताया गया है। इस स्थिति ने जलवायु परिवर्तन के जोखिमों को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर अधिक प्रभावी कदम उठाने की जरूरत को रेखांकित किया है।
अमेरिका में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में सबसे बड़ी वृद्धि
UNEP की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष दुनिया की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिका में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की गई। देश का उत्सर्जन 133 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य बढ़ गया।
रिपोर्ट में इस वृद्धि के पीछे बिजली की बढ़ती मांग और कोयले से बिजली उत्पादन में इजाफे को प्रमुख कारण बताया गया है। ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता उत्सर्जन वातावरण में गर्मी को रोकने की प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे वैश्विक तापमान में वृद्धि का खतरा बढ़ता है।
UNEP का अनुमान है कि अमेरिकी नीतियों में बदलाव के कारण सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में अतिरिक्त 0.1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है।
पेरिस जलवायु समझौते का लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि दुनिया पेरिस जलवायु समझौते के निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में पर्याप्त प्रगति नहीं कर रही है। इस समझौते का उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर की तुलना में 2 डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे रखना और इसे 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने का प्रयास करना है।
मौजूदा अनुमानों के अनुसार, यदि देश अपनी वर्तमान प्रतिबद्धताओं के अनुरूप कदम उठाते हैं, तब भी तापमान वृद्धि 2.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकती है। यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सीमित करने के वैश्विक प्रयासों के सामने बड़ी चुनौती पेश करती है।
संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल कार्रवाई पर दिया जोर
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने जलवायु परिवर्तन के जोखिमों को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई की अपील की है। उनका आह्वान ऐसे समय आया है, जब वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने के लिए उत्सर्जन में तेज कटौती की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
UNEP के अनुसार, जलवायु जोखिमों को सीमित करने के लिए वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वर्ष 2030 तक 18 प्रतिशत और वर्ष 2040 तक 69 प्रतिशत की कमी लाना जरूरी है।
उत्सर्जन में कटौती के बिना बढ़ेंगे जलवायु जोखिम
रिपोर्ट का मुख्य संदेश है कि मौजूदा जलवायु प्रतिबद्धताएं वैश्विक तापमान वृद्धि को सुरक्षित सीमा में रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उत्सर्जन में अपेक्षित कमी हासिल करने के लिए देशों को अपनी नीतियों और कार्ययोजनाओं पर तेजी से अमल करना होगा।
UNEP की चेतावनी वैश्विक समुदाय के सामने जलवायु लक्ष्यों और वास्तविक प्रगति के बीच अंतर को उजागर करती है। तापमान वृद्धि को सीमित करने के लिए आने वाले वर्षों में उत्सर्जन में उल्लेखनीय कटौती और देशों के बीच प्रभावी सहयोग महत्वपूर्ण होगा।
