चीन ने दुर्लभ मृदा निर्यात को सुव्यवस्थित किया: क्या तनाव घटेगा?

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एक संभावित महत्वपूर्ण विनियामक बदलाव के तहत, चीन ने एक नई दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth) लाइसेंसिंग प्रणाली की रूपरेखा तैयार करना शुरू कर दिया है, जो निर्यात शिपमेंट को सुव्यवस्थित और तेज़ कर सकती है। इस विकास पर वॉशिंगटन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधकों की कड़ी नजर है। हालांकि, योजना से जुड़े उद्योग सूत्रों ने आगाह किया है कि नई प्रणाली से रणनीतिक निर्यात प्रतिबंधों की पूर्ण समाप्ति की संभावना नहीं है, जो बीजिंग के अमेरिका के साथ चल रहे व्यापारिक टकराव में एक शक्तिशाली उपकरण रहे हैं।

वाणिज्य मंत्रालय (MOFCOM) ने चुनिंदा दुर्लभ मृदा निर्यातकों को सूचित किया है कि वे जल्द ही नए, सुव्यवस्थित परमिट के लिए आवेदन कर सकेंगे। इन सामान्य लाइसेंसों के एक साल तक वैध रहने और संभावित रूप से बड़ी निर्यात मात्रा की अनुमति देने की उम्मीद है, जिससे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को अधिक पूर्वानुमान मिल सकेगा। वर्तमान में, कंपनियां दस्तावेज़ीकरण तैयार कर रही हैं, जिसके लिए उन्हें अपने विदेशी ग्राहकों से अधिक व्यापक जानकारी सुरक्षित करनी होगी।

दुर्लभ मृदा का रणनीतिक मूल्य

इन नियंत्रणों का विषय, दुर्लभ मृदा तत्व (REEs), 17 रासायनिक रूप से अद्वितीय तत्वों का एक समूह है जो आधुनिक उच्च-तकनीक के लिए महत्वपूर्ण हैं। वे इलेक्ट्रिक वाहनों और पवन टर्बाइनों में उपयोग किए जाने वाले उच्च-शक्ति वाले मैग्नेट से लेकर मिसाइलों और जेट लड़ाकू विमानों जैसे उन्नत सैन्य हार्डवेयर तक हर चीज़ के आवश्यक घटक हैं। इस क्षेत्र में चीन का प्रभुत्व बहुत बड़ा है: यह इन खनिजों के विश्व के 90% से अधिक प्रसंस्करण और शोधन क्षमता को नियंत्रित करता है, जिससे उनके निर्यात पर कोई भी प्रतिबंध एक प्रमुख भू-राजनीतिक हथियार बन जाता है।

अप्रैल में पेश किए गए और अक्टूबर में विस्तारित किए गए नियंत्रणों के शुरुआती दौर (ऐतिहासिक संदर्भ) ने आपूर्ति की महत्वपूर्ण कमी पैदा की, जिसने वैश्विक विनिर्माण को बाधित किया और यूरोपीय ऑटो उद्योग के कुछ हिस्सों को क्षण भर के लिए रोक दिया। अप्रैल के बाद यूरोपीय संघ की फर्मों द्वारा प्रस्तुत 2,000 लाइसेंसिंग आवेदनों में से, बमुश्किल आधे ही स्वीकृत हुए थे, जो गतिरोध की गंभीरता को उजागर करता है।

दोनों देशों के नेताओं के बीच हुए एक उच्च-स्तरीय समझौते के बाद, चीन ने हाल ही में कुछ प्रतिबंधों पर एक साल के लिए रोक लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद व्हाइट हाउस ने सामान्य लाइसेंसों की शुरुआत को निर्यात नियंत्रणों की “वास्तविक समाप्ति” के रूप में वर्णित किया था।

पूर्ण समाप्ति पर उद्योग का संदेह

वॉशिंगटन के आशावाद के बावजूद, चीनी उद्योग के अंदरूनी सूत्रों का सुझाव है कि नए परमिट मुख्य रूप से प्रशासनिक सुव्यवस्थीकरण का प्रतिनिधित्व करते हैं और पहले लगाए गए व्यापक नियंत्रणों को पूरी तरह से हटाने का संकेत नहीं देते हैं। सूत्रों का कहना है कि रक्षा या उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े ग्राहकों के लिए इन एक साल के सामान्य लाइसेंस को सुरक्षित करना शायद अधिक कठिन होगा।

विनियामक दृष्टिकोण के निहितार्थों पर बोलते हुए, दिल्ली स्थित भू-राजनीतिक अर्थव्यवस्था विश्लेषक, डॉ. प्रिया वर्मा ने कहा, “जबकि सुव्यवस्थीकरण की दिशा में कोई भी कदम स्वागत योग्य है, चीनी प्रसंस्करण क्षमता पर वैश्विक निर्भरता मौलिक अड़चन बनी हुई है। जब तक विविधीकृत आपूर्ति श्रृंखलाएं पूरी तरह से परिचालन में नहीं आती हैं, तब तक बीजिंग मामूली विनियामक बदलावों की परवाह किए बिना महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक लाभ बनाए रखेगा।”

चीनी अधिकारियों ने, नई प्रणाली पर काम करते हुए, निजी तौर पर संकेत दिया है कि कार्यान्वयन में कई महीने लग सकते हैं। उद्योग भर में व्याप्त सतर्क आशावाद इस समझ से संतुलित है कि इस महत्वपूर्ण वस्तु पर रणनीतिक नियंत्रण बीजिंग के हाथों में मजबूती से बना हुआ है। निर्यातक और खरीदार अधिक स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसके वर्ष के अंत तक आने की उम्मीद है।

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