पाकिस्तान में मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं लगातार गहराती जा रही हैं। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए उपलब्ध लोकतांत्रिक और संस्थागत दायरा लगातार सीमित होता जा रहा है। आयोग ने सरकार से संविधान में प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने और मीडिया संस्थानों की संपादकीय स्वायत्तता सुनिश्चित करने की अपील की है।
HRCP की यह प्रतिक्रिया वरिष्ठ पत्रकार मुनीज़ा जहांगीर के लंबे समय से प्रसारित हो रहे टेलीविजन कार्यक्रम “स्पॉटलाइट” को हाल ही में प्रसारण से हटाए जाने के बाद सामने आई। आयोग ने कहा कि इस घटना को केवल एक अलग मामला मानकर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह पाकिस्तान में मीडिया पर बढ़ते दबाव और प्रतिबंधों की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है।
मानवाधिकार आयोग ने अपने बयान में कहा कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद होती है। यदि मीडिया संस्थानों पर लगातार दबाव बनाया जाता है या उनके कार्यक्रमों को बिना स्पष्ट कारण बंद किया जाता है, तो इससे न केवल पत्रकारों की स्वतंत्रता प्रभावित होती है बल्कि आम नागरिकों के सूचना प्राप्त करने के अधिकार पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
आयोग ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करे। साथ ही मीडिया संस्थानों को संपादकीय निर्णय स्वतंत्र रूप से लेने का वातावरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे बिना किसी अनुचित दबाव के निष्पक्ष और तथ्यात्मक पत्रकारिता कर सकें।
HRCP ने यह भी कहा कि जनता का यह अधिकार है कि वह उन सरकारी नीतियों और फैसलों पर सवाल उठा सके जो सीधे उनके जीवन और अधिकारों को प्रभावित करते हैं। इसके लिए स्वतंत्र मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि मीडिया की स्वतंत्रता सीमित होती है, तो लोकतांत्रिक जवाबदेही भी कमजोर पड़ सकती है।
आयोग ने संकेत दिया कि हाल के वर्षों में पाकिस्तान में मीडिया से जुड़े कई मामलों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ी है। ऐसे माहौल में स्वतंत्र पत्रकारों और समाचार संस्थानों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वे बिना भय या दबाव के अपना कार्य कर सकें।
मानवाधिकार आयोग ने सरकार से आग्रह किया कि वह मीडिया स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए, संपादकीय स्वायत्तता का सम्मान करे और यह सुनिश्चित करे कि नागरिकों को निष्पक्ष, स्वतंत्र और विश्वसनीय जानकारी प्राप्त होती रहे। आयोग का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता का संरक्षण अनिवार्य है।
