भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत रही। मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को नई दिल्ली में यह जानकारी देते हुए कहा कि विनिर्माण क्षेत्र और निवेश में मजबूती ने आर्थिक विकास को समर्थन दिया है। इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन (GVA) 9.2 प्रतिशत रहा, जबकि अप्रैल से सितंबर की अवधि में वस्तुओं के निर्यात में 18.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
डॉ. नागेश्वरन ने ये बातें भारत के औद्योगिक बदलाव पर आयोजित ISID-IDRA चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कहीं। सम्मेलन का विषय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच औद्योगिक रणनीति को नए सिरे से तैयार करने पर केंद्रित था।
विनिर्माण और निवेश से आर्थिक वृद्धि को समर्थन
मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुसार, पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक GDP वृद्धि के पीछे विनिर्माण और निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विनिर्माण क्षेत्र का GVA 9.2 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो औद्योगिक गतिविधियों के प्रदर्शन को रेखांकित करता है।
वहीं, अप्रैल-सितंबर के दौरान वस्तुओं के निर्यात में 18.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। सरकार भारतीय कारोबारियों और उद्यमियों के लिए नए बाजारों के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का विस्तार भी कर रही है।
डॉ. नागेश्वरन ने कहा कि इन समझौतों से विशेष रूप से श्रम-प्रधान विनिर्माण और उन्नत उद्योगों को अवसर मिल सकते हैं।
कम लागत से आगे बढ़कर वैश्विक निर्भरता बनाने पर जोर
डॉ. नागेश्वरन ने कहा कि भारत को केवल सबसे कम लागत पर उत्पाद बनाने की रणनीति तक सीमित नहीं रहना चाहिए। देश का लक्ष्य ऐसे उत्पाद, तकनीक और क्षमताएं विकसित करना होना चाहिए, जिनके लिए वैश्विक बाजार भारत पर निर्भर रह सकें।
उनके अनुसार, भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी भूमिका मजबूत करने के लिए प्रतिस्पर्धी विनिर्माण और तकनीकी क्षमताओं का विकास करना होगा। इससे देश की आर्थिक मजबूती बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी स्थिति बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
कृषि से तकनीक आधारित उद्योगों की ओर बढ़ने की जरूरत
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारत को कृषि क्षेत्र में अपनी पारंपरिक ताकत और हरित तथा श्वेत क्रांति की उपलब्धियों से आगे बढ़ते हुए नए औद्योगिक अवसर तैयार करने होंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि और खाद्य प्रसंस्करण का महत्व बना रहेगा, लेकिन देश को कृषि से तकनीक-आधारित उद्योगों तक पहुंचने का रास्ता भी मजबूत करना चाहिए। इसके लिए बेहतर शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी नवाचार और उत्पादकता में वृद्धि आवश्यक है।
इस रणनीति से श्रमिकों की क्षमताओं को बेहतर बनाने और उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप कार्यबल तैयार करने में मदद मिल सकती है।
जरूरी संसाधनों की आपूर्ति सुरक्षित करने पर जोर
डॉ. नागेश्वरन ने आर्थिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण संसाधनों तक भरोसेमंद पहुंच को आवश्यक बताया। उन्होंने घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आयात के स्रोतों में विविधता लाने और जरूरी वस्तुओं का पर्याप्त भंडार तैयार करने पर जोर दिया।
इन संसाधनों में ऊर्जा, औद्योगिक धातुएं, उर्वरक, दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख घटक और महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। उनके अनुसार, आपूर्ति श्रृंखलाओं में संभावित बाधाओं से निपटने के लिए भारत को घरेलू उत्पादन और संसाधन सुरक्षा पर ध्यान देना होगा।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए समन्वित रणनीति
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए घरेलू विनिर्माण मजबूत करना, महत्वपूर्ण आपूर्ति सुरक्षित रखना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमताएं विकसित करना जरूरी है।
उन्होंने ऐसी समन्वित औद्योगिक रणनीति अपनाने पर जोर दिया, जो भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम बनाए। यह दृष्टिकोण विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अहम माना गया।
